ट्रेन से गिरकर यात्री की मौत, शव के टुकड़ों में मिलने से मुआवजे का दावा खारिज नहीं हो सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि ट्रेन से गिरने के बाद यात्री का शव कई टुकड़ों में मिला हो, तो केवल इस आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मौत रेलवे एक्ट की धारा 124-A में दिए गए अपवादों के अंतर्गत हुई थी। रेलवे को आत्महत्या, स्वयं को चोट पहुंचाने या यात्री के अपने आपराधिक कृत्य जैसी परिस्थितियों को ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों से साबित करना होगा।
जस्टिस सैयद कमर हसन रिजवी ने रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल, लखनऊ के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें शिव नारायण सिंह की विधवा के मुआवजे के दावे को खारिज कर दिया गया था।
ट्रेन से गिरने का दावा
मामले के अनुसार, शिव नारायण सिंह ने 21 नवंबर 2011 को इटावा से दिल्ली जाने के लिए लाल किला एक्सप्रेस में यात्रा की थी। उनकी पत्नी का दावा था कि उन्होंने सेकेंड क्लास टिकट खरीदा था और सराय भूपत रेलवे स्टेशन के पास चलती ट्रेन से गिर गए।
बाद में उनका शव रेलवे लाइन के दोनों ओर तीन टुकड़ों में मिला। सिर बुरी तरह कुचला हुआ था और शरीर का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त था। इसी आधार पर रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने माना कि संभवतः यात्री ट्रेन से कट गया था और इसलिए यह मामला रेलवे एक्ट की धारा 123(c)(2) और 124-A के तहत मुआवजे योग्य नहीं है।
हाईकोर्ट ने कहा, केवल शव की स्थिति से निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता
हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के निष्कर्ष को अनुमान पर आधारित बताया। कोर्ट ने कहा कि शव कई टुकड़ों में मिलने मात्र से यह साबित नहीं होता कि यात्री ट्रेन से गिरने के बजाय ट्रेन से कटकर मरा था।
कोर्ट ने कहा कि अचानक झटका लगने, अधिक भीड़ या ट्रेन के अचानक चलने अथवा ब्रेक लगने से यात्री का संतुलन बिगड़ सकता है। ऐसी स्थिति में गिरने के बाद शरीर ट्रेन के पहियों या अन्य चलने वाले हिस्सों की चपेट में आ सकता है और शरीर के गंभीर रूप से क्षत-विक्षत होने की संभावना रहती है।
टिकट नहीं मिलने से यात्रा गैर-कानूनी नहीं हो जाती
रेलवे ने दलील दी कि मृतक के पास से टिकट बरामद नहीं हुआ था। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के Union of India v. Rina Devi फैसले का हवाला देते हुए कहा कि टिकट का बरामद न होना अपने आप में यात्री की bona fide यात्रा को नकारने के लिए पर्याप्त नहीं है।
कोर्ट ने पाया कि रेलवे ने इटावा स्टेशन से टिकट बिक्री का कोई रिकॉर्ड पेश नहीं किया, जिससे विधवा के दावे को खारिज किया जा सके।
कोर्ट ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट और इनक्वेस्ट रिपोर्ट का भी उल्लेख किया, जिसमें मौत का कारण गंभीर चोटों से हुआ shock और haemorrhage बताया गया था तथा मृतक के ट्रेन से गिरने की जानकारी दर्ज थी।
रेलवे को 8 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश
हाईकोर्ट ने माना कि मृतक की विधवा मुआवजे की हकदार है। कोर्ट ने कहा कि घटना के समय निर्धारित मुआवजा 4 लाख रुपये था, जबकि 1 जनवरी 2017 से यह राशि बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने रेलवे को 8 लाख रुपये का मुआवजा आठ सप्ताह के भीतर देने का आदेश दिया। निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने पर राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।