चुनाव याचिका में जाति प्रमाणपत्र की वैधता की जांच नहीं कर सकता चुनाव न्यायाधिकरण: इलाहाबाद हाईकोर्ट

Update: 2026-07-17 07:26 GMT

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि चुनाव याचिका की सुनवाई के दौरान चुनाव न्यायाधिकरण किसी जाति प्रमाणपत्र की वैधता की जांच नहीं कर सकता और न ही उसे फर्जी घोषित करने का अधिकार रखता है।

जस्टिस नीरज तिवारी ने स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाणपत्र की वैधता तय करने या उसे निरस्त करने का अधिकार केवल राज्य सरकार द्वारा गठित जिला, मंडलीय और राज्य स्तरीय जांच समितियों को है। चुनाव न्यायाधिकरण इस विषय पर निर्णय देने का अधिकार नहीं रखता।

कोर्ट ने कहा,

"अब यह पूरी तरह स्पष्ट है कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाणपत्र को न तो चुनाव याचिका में चुनौती दी जा सकती है और न ही चुनाव न्यायाधिकरण उसकी जांच कर सकता है। जाति प्रमाणपत्र को वैध या अवैध घोषित करने का अधिकार केवल राज्य सरकार द्वारा गठित समितियों के पास है।"

मामला कुशीनगर जिले की रामकोला विधानसभा सीट से विधायक विनय प्रकाश गोंड के चुनाव से जुड़ा है। याचिकाकर्ता राधा चरण ने आरोप लगाया कि विनय प्रकाश गोंड अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंध रखते हैं, लेकिन उन्होंने अनुसूचित जाति का कथित रूप से फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाकर वर्ष 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ा।

याचिकाकर्ता ने नामांकन के समय रिटर्निंग अधिकारी से शिकायत कर नामांकन रद्द करने की मांग की थी, लेकिन इसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद विनय प्रकाश गोंड चुनाव जीत गए। याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि संबंधित जाति प्रमाणपत्र का मामला जिला स्तरीय समिति के समक्ष लंबित है।

वहीं विधायक की ओर से कहा गया कि वह गोंड जाति से हैं, जिसे 3 दिसंबर 1987 के सरकारी आदेश के तहत अनुसूचित जाति की सूची में शामिल किया गया। उनका यह भी कहना था कि जिला स्तरीय समिति पहले ही उनके जाति प्रमाणपत्र की जांच कर उसे सही मान चुकी है और प्रमाणपत्र कभी निरस्त नहीं किया गया।

हाईकोर्ट ने कहा कि जाति प्रमाणपत्र जारी करने और उसकी जांच के लिए कानून में अलग और पूर्ण व्यवस्था मौजूद है। यदि किसी प्रमाणपत्र को चुनौती देनी है तो पहले जिला स्तरीय समिति, फिर मंडलीय समिति और अंत में राज्य स्तरीय समिति के समक्ष जाना होगा। राज्य स्तरीय समिति के अंतिम निर्णय के बाद ही संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के कुमारी माधुरी पाटिल, दयराम और ए. राजा मामलों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि विधिवत जारी जाति प्रमाणपत्र को चुनाव याचिका के माध्यम से चुनौती नहीं दी जा सकती।

इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने चुनाव याचिका खारिज की।

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