इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टाउन प्लानिंग में कमियों, खासकर शहरों, कस्बों और कॉलोनियों के लिए लेआउट प्लान बनाते समय कचरा डंपिंग/कलेक्शन के लिए जगह तय न करने और ट्रांसफॉर्मर लगाने की व्यवस्था न करने को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए एक जनहित याचिका (PIL) शुरू की।

जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने कहा कि इस मुद्दे पर विचार करने की ज़रूरत है, क्योंकि यह टाउन प्लानिंग से जुड़ा है और डेवलपमेंट अथॉरिटी (जिसमें उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद भी शामिल है) द्वारा विकसित कॉलोनियों में रहने वाले लोगों के "स्वस्थ, स्वच्छ और सुरक्षित जीवन" पर असर डालता है।

कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह "इन री - लेआउट प्लान / टाउन प्लानिंग एंड प्रोविज़न ऑफ़ नेसेसरी एमेनिटीज़" (लेआउट प्लान / टाउन प्लानिंग और ज़रूरी सुविधाओं का प्रावधान) शीर्षक से एक स्वतः संज्ञान PIL अलग से दर्ज करे।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस मामले को 16 अक्टूबर को एक नए मामले के तौर पर पेश किया जाए।

बेंच कचरा डंपिंग स्पॉट की सफाई से जुड़ी एक मौजूदा PIL पर सुनवाई कर रही थी।

सुनवाई के दौरान, नगर निगम के वकील ने लेआउट प्लान बनाने के तरीके से जुड़ी एक बड़ी समस्या की ओर इशारा किया।

उन्होंने कहा कि लेआउट प्लान बनाते समय डेवलपमेंट अथॉरिटी कचरा डंपिंग/कलेक्शन के लिए कोई जगह तय नहीं करती हैं। नतीजतन, जब बाद में कॉलोनियां विकसित की जाती हैं, तो तय जगह न होने से समस्याएं पैदा होती हैं।

वकील ने आगे कहा कि ट्रांसफॉर्मर लगाने का भी कोई प्रावधान नहीं किया जाता। इसके परिणामस्वरूप, बाद में सड़कों के किनारे ट्रांसफॉर्मर लगाए जाते हैं, जिससे "आवाजाही में बाधा और अन्य असुविधा" होती है।

इस मुद्दे पर ध्यान देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि यह विचार करने योग्य मामला है क्योंकि यह टाउन प्लानिंग और ज़रूरी सुविधाओं के प्रावधान से संबंधित है।

स्वतः संज्ञान PIL दर्ज करने का निर्देश देते हुए कोर्ट ने कार्यवाही का दायरा भी तय किया।

कोर्ट ने कहा कि PIL में "शहर या कस्बे या शहर/कस्बे के भीतर किसी कॉलोनी के लिए लेआउट प्लान बनाते समय दी जाने वाली ज़रूरी सुविधाओं / जगहों" और टाउन प्लानिंग से जुड़े मामलों पर ध्यान दिया जाएगा।

बेंच ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि प्लानिंग अथॉरिटी को "समय की बदलती ज़रूरतों" और "भविष्य की ज़रूरतों का भी अनुमान लगाकर" उन ज़रूरतों के हिसाब से चलने की ज़रूरत को ध्यान में रखना चाहिए। रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया कि वह 'सुओ मोटो' (खुद से शुरू की गई) कार्यवाही में कई अधिकारियों/संस्थाओं को विपक्षी पक्ष के तौर पर शामिल करे।

इनमें शामिल हैं: उत्तर प्रदेश राज्य (अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रधान सचिव, आवास एवं शहरी नियोजन; अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रधान सचिव, शहरी विकास; आवास आयुक्त, उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद; मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक के माध्यम से); लखनऊ विकास प्राधिकरण (उपाध्यक्ष के माध्यम से); लखनऊ नगर निगम (नगर आयुक्त के माध्यम से); उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन (प्रबंध निदेशक के माध्यम से); और मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (प्रबंध निदेशक के माध्यम से)।

Case Title : In Re - Layout Plan Town Planning and Provision of Necessary Amenities

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