प्रसिद्ध क्रिकेटर मोहम्मद शमी के भाई और रणजी क्रिकेटर मोहम्मद कैफ को इलाहाबाद हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिली। कोर्ट ने निर्देश दिया कि शादी का झूठा वादा करके यौन संबंध बनाने के आरोपों में उनके खिलाफ दर्ज FIR के मामले में उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।

यह आदेश अगली सुनवाई की तारीख, 4 नवंबर तक लागू रहेगा।

जस्टिस रजनीश कुमार और जस्टिस ज़फीर अहमद की खंडपीठ ने 24 अक्टूबर को यह आदेश पारित किया। यह आदेश कैफ की उस आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें उन्होंने लखनऊ के एक पुलिस स्टेशन में अपने खिलाफ दर्ज FIR को चुनौती दी थी।

हालांकि, कोर्ट ने कैफ को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने आदेश दिया,

"अगली सुनवाई की तारीख तक याचिकाकर्ता को इस FIR के सिलसिले में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, लेकिन उसे जांच में सहयोग करना होगा।"

इस साल 13 सितंबर को उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 69 (धोखाधड़ी आदि के जरिए यौन संबंध बनाना) और 351(3) [आपराधिक धमकी] के तहत FIR दर्ज की गई। इसके बाद कैफ ने FIR रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

उनकी ओर से पेश हुए वकील नदीम मुर्तजा ने दलील दी कि यह FIR एक "गलत और मनगढ़ंत कहानी" पर आधारित है और याचिकाकर्ता ने कभी शादी का कोई वादा नहीं किया था।

यह भी तर्क दिया गया कि यह FIR उन्हें बदनाम करने के लिए दर्ज कराई गई। शिकायतकर्ता ने सबसे पहले 29 अप्रैल, 2026 को सोशल मीडिया पॉडकास्ट में ये आरोप लगाए।

याचिका का विरोध करते हुए शिकायतकर्ता के वकील ने कहा कि FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत एक संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) का मामला बनता है।

वकील ने रिट याचिका के पैराग्राफ 35 में याचिकाकर्ता द्वारा किए गए दावे पर भी आपत्ति जताई। सुनवाई के दौरान, राज्य की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सरकारी वकील (AGA) ने बताया कि धारा 180 और 183 के तहत दर्ज शिकायतकर्ता के बयानों में विरोधाभास है।

राज्य ने अदालत को यह भी बताया कि जांच अधिकारी ने उच्च अधिकारियों से FIR को दिल्ली स्थानांतरित करने की सिफारिश की, क्योंकि मुख्य आरोप दिल्ली से जुड़े हैं। बताया गया कि यह मामला अभी लखनऊ के पुलिस उपायुक्त (DCP) के पास लंबित है।

इसके जवाब में कैफ के वकील ने कहा कि FIR को स्थानांतरित करने की सिफारिश पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है और याचिकाकर्ता को गिरफ्तारी का डर है।

अतिरिक्त सरकारी वकील (AGA) ने इस बारे में निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा कि क्या स्थानांतरण की सिफारिश पर कोई निर्णय लिया गया है या नहीं।

इन दलीलों पर ध्यान देते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि जब तक मामला अगली बार सूचीबद्ध (लिस्ट) नहीं होता, तब तक कैफ को इस FIR के सिलसिले में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, बशर्ते वह जांच में सहयोग करे।

मामले को 4 नवंबर को फिर से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया।

Case Title : Mohammad Kaif vs. State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Deptt. Of Home Lko. And Others

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