असम में नेशनल सिटीजन्स ( NRC ) से छोड़े गए 40 लाख लोगों के दावों और आपत्तियों से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तारीख तय कर दी है। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति  रोहिंटन नरीमन की पीठ ने कहा है कि जिन लोगों के नाम NRC में नहीं हैं उनके दावे और आपत्ति दर्ज कराने की  25 सितंबर से शुरुआत होगी और ये प्रक्रिया 60 दिनों तक चलेगी। हालांकि पीठ ने साफ किया कि ये दावे और आपत्ति सिर्फ  10 दस्तावेज के आधार पर दर्ज होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो अन्य 5 दस्तावेज हैं उन पर बाद में विचार किया जाएगा।

बुधवार को पीठ ने NRC कॉर्डिनेटल प्रतीक हजेला को केंद्र सरकार के हलफ़नामे पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। दरअसल केंद्र सरकार ने पांच अतरिक्त दस्तावेज भी शामिल करने की गुहार की है। दरअसल केंद्र चाहता है कि दावे और आपत्तियों के लिए 15 दस्तावेज स्वीकार्य हों जबकि हजेला ने रिपोर्ट दाखिल कर दस दस्तावेज ही प्रस्तावित किए थे। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा हम उन लोगों को दोबारा मौका नहीं देना चाहते जो पहले कहें कि ये उनके दादा हैं। जब वो कड़ी नहीं मिलती तो वो कहें कि ये नहीं वो उनके दादा हैं। सुप्रीम कोर्ट 23 अक्तूबर को अगली सुनवाई करेगा।

इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने SOP पर विभिन्न राजनीतिक दलों के सुझाव लेने की मांग खारिज कर दी थी। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति  रोहिंटन नरीमन की पीठ ने केंद्र द्वारा दाखिल SOP  रिकॉर्ड करते हुए यह स्पष्ट कर दिया था कि किसी भी राजनीतिक दल या नए हस्तक्षेपकर्ताओं को केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा SOP के मसौदे में अपने आपत्ति / सुझाव दर्ज करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बेंच ने NRC के मसौदे में छोड़ी गई आबादी के जिलावार प्रतिशत की एक मुहरबंद कवर रिपोर्ट मांगी थी जिसमें असम में 40 लाख से ज्यादा लोगों को नागरिकता के निर्धारण के लिए हटा दिया था।दरअसल अपने हलफनामे में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा था कि गैर-समावेश के कारणों के बारे में लोगों को सूचित करने की प्रक्रिया 10 अगस्त को शुरू की गई है। न्यायमूर्ति गोगोई ने कहा था कि अदालत SOP पर इस चरण में कोई टिप्पणी या अवलोकन नहीं कर रही, भले ही याचिकाकर्ता असम लोक निर्माण, अखिल असम छात्र संघ (एएएसयू), अखिल असम अल्पसंख्यक छात्र संघ और जमीयत-ए-उलेमा SOP को लेकर अपनी आपत्तियो और सुझावों को दर्ज करा सकते हैं।

पीठ ने कुछ अन्य संगठनों की याचिका खारिज कर दी जो 'SOP' पर अपने सुझाव और आपत्तियों के लिए अपने हस्तक्षेप आवेदनों को दर्ज करना चाहते थे। जब एक वकील ने अपने हस्तक्षेप की अनुमति देने के लिए याचिका जारी रखी तो न्यायमूर्ति गोगोई ने दृढ़ता से कहा था कि कोई हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। "किसके लिए अनुमति दी जाएगी हम तय करेंगे। यह हमारा विवेकाधिकार है। यह हमारा विशेषाधिकार है, " न्यायमूर्ति गोगोई ने यह भी स्पष्ट किया था कि इस मामले में किसी भी राजनीतिक दल को हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पीठ ने हजेला से प्रत्येक पंचायत कार्यालय, सरकारी प्रतिष्ठानों और NRC केंद्रों में NRC के मसौदे की प्रतियां उपलब्ध कराने के लिए कहा था ताकि लोगों को उनके दावे और आपत्तियां दर्ज  करने में आसानी हो सके।अदालत ने यह भी कहा था कि ड्राफ्ट में उल्लिखित अन्य समय-सारिणी इस समय लागू नहीं होगी और अदालत इसका फैसला करेगी। सर्वोच्च न्यायालय लगातार NRC अपडेट की निगरानी कर रहा है।