मोटर वाहन दुर्घटना दावा : अगर वाहन ट्रांसफर अथॉरिटी में पंजीकृत नहीं है तो वाहन का मूल मालिक करेगा दावे का भुगतान [निर्णय पढ़ें]

Update: 2018-02-07 15:29 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने नवीन कुमार बनाम विजय कुमार मामले में अपने फैसले में कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत ‘मालिक’ वह है जिसके नाम पर वाहन पंजीकृत है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने कहा कि वाहन का पंजीकृत मालिक जिसने वाहन का हस्तांतरण कर दिया है पर रजिस्ट्री अथॉरिटी के रिकॉर्ड में उसे अब भी वाहन का मालिक बताया जा रहा है तो वह किसी भी तरह के दायित्व से मुक्त नहीं होगा।

इस मामले में दुर्घटना में शामिल वाहन कई हाथों से गुजरा था। जब दुर्घटना के बाद दावा किया गया तो पक्षकारों ने कहना शुरू कर दिया कि उन्होंने वाहन को किसी और को बेच दिया है। चूंकि वाहन का बीमा नहीं हुआ था, ट्रिब्यूनल ने कहा कि पंजीकरण अथॉरिटी के रिकॉर्ड के मुताबिक़ जो वाहन का मालिक है वह संयुक्त रूप से ड्राईवर के साथ मिलकर दायित्व का भुगतान करेगा।

हालांकि, अपील पर हाई कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के निष्कर्षों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि जब यह पता है कि वाहन को किसी और हो हस्तांतरित कर दिया गया है तो ट्रिब्यूनल का पंजीकृत मालिक के खिलाफ आदेश देने का औचित्य नहीं है। अंतिम मालिक को इस दायित्व का भुगतान करने को कहा गया जिसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

पीठ ने कहा कि पुरन्या कला देवी बनाम असम राज्य मामले में जो फैसला आया उसमें यह नहीं कहा गया है कि जो व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को वाहन हस्तांतरित करता है लेकिन उसका नाम अभी भी धारा 2(30) के तहत पंजीकृत मालिक के रूप में दर्ज है तो वह सारे दायित्वों से मुक्त है।

कोर्ट ने कहा, “धारा 2(30) के प्राधानों के तहत सिद्धांत यह है कि वाहन दुर्घटनाग्रस्त होती है और अगर किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो दुर्घटना का शिकार हुए व्यक्ति के कानूनी वारिस को अनिश्चितता में नहीं छोड़ा जा सकता। जिसको मुआवजा मिलना चाहिए उसको इस बात से क्या मतलब है कि वाहन किन-किन हाथों से गुजरा है और कौन पंजीकरण अथॉरिटी के पास पंजीकृत नहीं है...वर्तमान मामले में पहला प्रतिवादी धारा 2(30) के अनुसार दुर्घटनाग्रस्त हुए वाहन का मालिक है। इसलिए मुआवजे के भुगतान की जिम्मेदारी उसी की है”।


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