मनी बिल के तौर पर पास आधार की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नवंबर के पहले हफ्ते में

Update: 2017-09-01 09:23 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वो आधार कार्ड को मनी बिल के तौर पर पास करने का मामले में कांग्रेसी नेता जयराम रमेश की याचिका पर नवंबर के पहले हफ्ते में सुनवाई करेगा।

शुक्रवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच के सामने वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि ये मामला आधार से जुडी अन्य याचिकाओं से अलग है। इसका उन याचिकाओं से कोई लेना देना नहीं है। इसलिए इस मामले की अलग सुनवाई के लिए जल्द बेंच का गठन किया जाए।

वहीं चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि फिलहाल उन्हें इस मामले की जल्द सुनवाई की वजह नजर नहीं आती। इसलिए इस मामले की सुनवाई नवंबर के पहले हफ्ते में करेंगे। गौरतलब है कि आधार को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में अनिवार्य करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं की भी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट नवंबर के पहले हफ्ते में करेगा। केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया था कि इस योजना की डेडलाइन को 30 सितंबर से बढाकर 31 दिसंबर 2017 कर दिया गया है।

पेश मामले की सुनवाई में याचिकाकर्ता जयराम रमेश की ओर से वरिष्ठ वकील पी चिदंबरम ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि आधार को बिल के तौर पर नहीं पास हो सकता। मनी बिल और आम बिल में फर्क होता है और हम कोर्ट को ये दिखा सकते है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर स्पीकर नीले को हरा कहेगा तो कोर्ट बताएगा कि ये नीला ही है हरा नहीं है। दरअसल केंद्र सरकार की तरफ से पेश अटॉर्नी जरनल ने कोर्ट में कहा की स्पीकर के फैसले को कोर्ट नहीं परख सकता।  कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा था कि जब राज्यसभा ने बिल में संशोधन करने के लिए कहा था तब उन्होंने क्या ये बात कही थी कि ये मनी बिल नहीं बल्कि आधार बिल है ?

वही केंद्र सरकार की तरफ से अटॉर्नी जरनल की दलील थी कि ये याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। क्योंकि ये जनहित याचिका अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल की गई है। कोई भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर देता है। अब समय आ गया है कि एेसी याचिकाओं के  लिए गाइड लाइन बनाई जानी चाहिए।


 

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