2013 की हिस्ट्रीशीट: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद POCSO मामले के शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज ने मामला रद्द कराने पहुंचे हाइकोर्ट

Amir Ahmad

5 May 2026 5:15 PM IST

  • 2013 की हिस्ट्रीशीट: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद POCSO मामले के शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज ने मामला रद्द कराने पहुंचे हाइकोर्ट

    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ दर्ज POCSO मामले के प्रथम सूचना दाता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने वर्ष 2013 में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा खोली गई अपनी हिस्ट्रीशीट को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने पुलिस निगरानी रजिस्टर से अपना नाम हटाने की भी मांग की।

    आशुतोष महाराज ने स्वयं अदालत में पेश होकर कहा कि उनके खिलाफ शामली जिले के कांधला थाने में हिस्ट्रीशीट खोली गई। याचिका में उनका कहना है कि जिन आपराधिक मामलों का हवाला देकर यह कार्रवाई की गई, उनमें कई मामलों में उन्हें ट्रायल के बाद बरी किया जा चुका है, कुछ मामलों की कार्यवाही स्थगित है, जबकि कई मामले धार्मिक संपत्ति से जुड़े दीवानी प्रकृति के हैं।

    जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने 28 अप्रैल को सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया और जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया। मामले को अब 13 मई को प्रवेश स्तर की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया।

    अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतरिम राहत की मांग पर अगली तिथि पर विचार किया जाएगा।

    आशुतोष महाराज स्वयं को श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट (पंजीकृत), मथुरा का अध्यक्ष बताते हैं और वे शाही ईदगाह–श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद से जुड़े मामलों में भी वादी हैं, जिनकी सुनवाई इलाहाबाद हाइकोर्ट में लंबित है।

    इसी आशुतोष महाराज के आवेदन पर प्रयागराज की स्पेशल POCSO कोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और अन्य के खिलाफ कठोर POCSO कानून के तहत यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज करने का आदेश दिया था। अदालत के निर्देश के बाद आरोपियों के खिलाफ POCSO Act की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।

    अपने आवेदन में आशुतोष महाराज ने आरोप लगाया कि माघ मेले 2025-26 के दौरान प्रयागराज में दो नाबालिगों एक लगभग 14 वर्ष और दूसरा 17 वर्ष 6 माह आयु का के साथ आरोपियों द्वारा यौन शोषण किया गया। उनका दावा था कि पीड़ितों ने स्वयं उन्हें घटना की जानकारी दी थी।

    उल्लेखनीय है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट इससे पहले 25 मार्च को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य को इस मामले में अग्रिम जमानत दे चुका है। उस दौरान अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि कथित पीड़ित नाबालिगों द्वारा अपने अभिभावकों के बजाय आशुतोष महाराज को घटना बताना असामान्य प्रतीत होता है।

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