BNS, BNSS और BSA में IPC, CrPC और IEA की धाराएं भी लिखना जरूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

Praveen Mishra

7 Oct 2025 3:31 PM IST

  • BNS, BNSS और BSA में IPC, CrPC और IEA की धाराएं भी लिखना जरूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि अब से जिन मामलों या याचिकाओं में नए आपराधिक कानूनों — जैसे भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) — का उल्लेख किया जाएगा, उनमें पुराने कानूनों — भारतीय दंड संहिता (IPC), दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (IEA) — की संबंधित धाराएं भी साथ में लिखना जरूरी होगा।

    जस्टिस श्री प्रकाश सिंह की पीठ ने यह आदेश देते हुए कहा कि याचिकाओं और अपीलों में केवल नए कानूनों की धाराएं लिखने से अदालत और वकीलों को काफी असुविधा होती है, क्योंकि अभी कई मामलों में पुराने और नए प्रावधानों की तुलना आवश्यक होती है।

    अदालत ने यह भी बताया कि अधिवक्ताओं ने स्वयं सुझाव दिया था कि पुराने कानूनों की समान धाराएं साथ में लिखने से मामलों के शीघ्र निपटारे में मदद मिलेगी। इसलिए अदालत ने रजिस्ट्री को सख्त निर्देश दिया है कि आगे से सभी याचिकाओं में दोनों कानूनों के प्रावधान शामिल किए जाएं।

    यह आदेश उस मामले में दिया गया जिसमें याचिकाकर्ताओं ने BNS की धारा 126(2), 194(2), 115(2) और 351(3) के तहत दर्ज मुकदमे को रद्द करने की मांग की थी। उनका कहना था कि यह FIR आवेदिका के पति ने प्रतिशोध में दर्ज कराई है, क्योंकि उसने पहले ही उसके खिलाफ BNS की धारा 85, 115(2), 352, 351(3) और दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मामला दर्ज कराया था।

    अदालत ने आवेदकों की दलीलों में दम पाते हुए विपक्षी पक्ष को नोटिस जारी किया और कहा कि अगली सुनवाई तक आपराधिक कार्यवाही पर रोक रहेगी। अब यह मामला 3 नवंबर 2025 से शुरू होने वाले सप्ताह में सुना जाएगा।

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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