CM योगी के खिलाफ़ कथित 'अपमानजनक' ईमेल भेजने के आरोपी को 2.5 साल बाद मिली हाईकोर्ट से ज़मानत
Shahadat
17 Sept 2026 9:23 AM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उस व्यक्ति को ज़मानत दी, जो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ़ अपमानजनक बातें लिखने वाला ईमेल भेजने के आरोप में लगभग 2.5 साल से जेल में है।
जस्टिस कृष्ण पहल की बेंच ने मुबारक अली की ज़मानत अर्ज़ी मंज़ूर की। अली पर 2024 में IPC की धाराओं 153A, 295A, 505(2), 504, 419, 420, 467, 468, 471 और 120-B और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट की धारा 66 के तहत मामला दर्ज किया गया।
आरोप के मुताबिक, अली ने पुलिस मुखबिर जन्नतुलनिसा के साथ अपना मामला सुलझाने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के खिलाफ़ "अपमानजनक बातें" लिखने वाला ईमेल भेजा था।
अली के वकील ने दलील दी कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया और उसके आपराधिक इतिहास में सिर्फ़ एक ही मामला दर्ज है।
यह भी बताया गया कि अली 20 मार्च, 2024 से जेल में बंद है और मुक़दमे की सुनवाई बहुत धीमी गति से चल रही है। वहीं, राज्य सरकार ने ज़मानत अर्ज़ी का विरोध किया।
हाईकोर्ट ने पहले मुक़दमे की स्थिति की जानकारी मांगी थी और पाया कि 23 जुलाई, 2026 तक सिर्फ़ 4 गवाहों से पूछताछ हुई थी, जबकि फ़ाइनल रिपोर्ट (चार्ज-शीट) के अनुसार 26 गवाहों से पूछताछ होनी बाकी थी।
इन हालात को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर ज़मानत का मामला बनता है तो किसी आरोपी को सिर्फ़ उसके आपराधिक इतिहास के आधार पर जेल में नहीं रखा जा सकता।
बेंच ने माना कि अली के आपराधिक इतिहास के बारे में सही जानकारी दी गई।
मामले के तथ्यों और हालात, दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों पर विचार करते हुए कोर्ट ने जेल में बिताई गई अवधि और मुक़दमे की गति को ध्यान में रखा।
मामले की असलियत पर कोई राय दिए बिना कोर्ट ने कहा कि आवेदक ने ज़मानत के लिए मामला बना लिया। इस तरह ज़मानत अर्ज़ी मंज़ूर कर ली गई। इसके बाद कोर्ट ने आदेश दिया कि अली को ज़मानत पर रिहा किया जाए, बशर्ते वह संबंधित कोर्ट की संतुष्टि के अनुसार पर्सनल बॉन्ड और उतनी ही राशि की दो ज़मानतें (Sureties) जमा करे और उन ज़मानतों का सत्यापन (Verification) हो जाए।
उसे यह भी निर्देश दिया गया कि वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ न करे, गवाहों को डराए-धमकाए नहीं और ज़रूरत पड़ने पर ट्रायल कोर्ट के सामने पेश हो।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ज़मानत की शर्तों का कोई भी उल्लंघन ज़मानत रद्द करने का आधार बनेगा।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ज़मानत देते समय की गई टिप्पणियां, गवाहों की गवाही के आधार पर स्वतंत्र राय बनाने में ट्रायल जज को "किसी भी तरह से प्रभावित नहीं करेंगी"।
Case title - Mubarak Ali vs. State of UP 2026 LiveLaw (AB) 709


