हाईकोर्ट से ज़मानत मिलने के दो दिन बाद बिजनौर जेल में कैदी की मौत; इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जेल DG से मांगा जवाब
Shahadat
18 Sept 2026 9:55 AM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिजनौर ज़िला जेल में एक कैदी की कथित कस्टडी में मौत के मामले में उत्तर प्रदेश के जेल प्रशासन और सुधार सेवाओं के महानिदेशक (DG) से जवाब मांगा।
कोर्ट ने कहा कि यह "गंभीर चिंता का विषय" है कि कस्टडी में हुई मौत के मामले में राज्य की ओर से "कोई संतोषजनक जवाब" नहीं दिया गया।
जस्टिस चंद्र धारी सिंह और जस्टिस तरुण सक्सेना की बेंच ने महानिदेशक को एक संक्षिप्त जवाबी हलफनामा (Counter-Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें उन हालात के बारे में बताया जाए, जिनमें याचिकाकर्ता के बेटे की जेल परिसर के अंदर मौत हुई।
कोर्ट ने दीपक कुमार की मौत से जुड़ी रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। याचिका के अनुसार, दीपक कुमार की मौत 10 मई, 2026 को कस्टडी में हुई, जबकि हाईकोर्ट ने उसे दो दिन पहले ही ज़मानत दी थी।
हाईकोर्ट ने महानिदेशक को 10 दिनों के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया; ऐसा न करने पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोर्ट के सामने पेश होने का आदेश दिया गया।
मामले का संक्षिप्त विवरण
याचिका के अनुसार, दीपक कुमार को 18 फरवरी, 2025 को IPC की धारा 394 और 411 तथा आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 के तहत अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया। उसे जुर्माने के साथ छह साल की कठोर सज़ा सुनाई गई।
याचिका में कहा गया कि बाद में उसने सज़ा और दोषसिद्धि को चुनौती दी और सज़ा पर रोक तथा ज़मानत की मांग की। हाईकोर्ट के एक सिंगल जज ने 8 मई, 2026 को उसे ज़मानत दी थी।
हालांकि, याचिका के अनुसार, ज़मानत के आदेश के दो दिन बाद यानी 10 मई, 2026 को बिजनौर ज़िला जेल में दीपक की मौत हो गई।
याचिका में आगे कहा गया कि दीपक की पत्नी ज़मानत के आदेश के एक दिन बाद 9 मई को जेल गई और जेल अधिकारियों को ज़मानत मिलने की जानकारी दी। आरोप है कि मुलाक़ात के दौरान दीपक ने अपनी जान को खतरा होने की आशंका जताई।
याचिकाकर्ता का दावा है कि 10 मई को दोपहर करीब 1:25 बजे उसकी पत्नी को एक फ़ोन कॉल आया, जिसमें उसे दीपक की मौत की सूचना दी गई। याचिका के अनुसार, उन्हें बताया गया कि दीपक की मौत जेल परिसर के अस्पताल में एक पेड़ से लटकने के कारण हुई।
याचिका में मृतक के परिवार वालों ने दीपक की मौत से जुड़ी परिस्थितियों के बारे में CCTV फुटेज और तस्वीरें भी मांगी।
याचिकाकर्ता का कहना है कि मौत जिन परिस्थितियों में हुई, उसके बावजूद इस बात का कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है कि हिरासत में रहते हुए दीपक की मौत कैसे हुई।
इसे देखते हुए कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ के जेल प्रशासन और सुधार सेवा महानिदेशक को निर्देश दिया कि वे 10 दिनों के भीतर एक संक्षिप्त जवाबी हलफनामा दाखिल करें, जिसमें विशेष रूप से उन परिस्थितियों का उल्लेख हो जिनमें याचिकाकर्ता के बेटे की जेल परिसर में मौत हुई।
कोर्ट ने आगे निर्देश दिया कि यदि तय समय के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं किया जाता है तो महानिदेशक को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट के समक्ष उपस्थित होना होगा।
मामले की सुनवाई 7 अक्टूबर, 2026 के लिए तय की गई।

