फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेजों के इस्तेमाल पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, याचिकाकर्ता और उसके वकील के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई का आदेश

  • फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेजों के इस्तेमाल पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, याचिकाकर्ता और उसके वकील के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई का आदेश

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका (PIL) में फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेजों के इस्तेमाल का प्रथम दृष्टया मामला पाए जाने पर याचिकाकर्ता और उसके अधिवक्ता के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया है।

    अदालत ने कहा कि फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट से रिकॉर्ड पर मौजूद हस्ताक्षरों में गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं, जिससे जालसाजी और दस्तावेजों में हेरफेर की आशंका बनती है।

    चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कुशीनगर स्थित तमकुहीराज एजुकेशन सोसाइटी और फतेह मेमोरियल इंटर कॉलेज के प्रबंधक की नियुक्ति में कथित अनियमितताओं को चुनौती दी गई थी।

    मामले ने तब नया मोड़ लिया जब एक प्रतिवादी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 379 के तहत आवेदन दाखिल कर आरोप लगाया कि याचिका वापस लेने के लिए दायर आवेदन पर उसके वकील के हस्ताक्षर फर्जी थे।

    साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ता की ओर से पेश होने वाला अधिवक्ता काल्पनिक पहचान का इस्तेमाल कर रहा था और अलग-अलग तारीखों पर अलग-अलग व्यक्ति स्वयं को उसका वकील बताकर अदालत में पेश हुए।

    इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने हस्ताक्षरों की जांच के लिए मामला एफएसएल, लखनऊ भेजा। जांच रिपोर्ट में विभिन्न दस्तावेजों पर किए गए हस्ताक्षरों में स्पष्ट अंतर पाया गया।

    एफएसएल रिपोर्ट के बाद संबंधित अधिवक्ता ने व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर कहा कि वह 'पॉलीयूरिया-पॉलीडिप्सिया' नामक बीमारी से पीड़ित हैं, जिसके कारण उनके हस्ताक्षरों में बदलाव आ गया। हालांकि, अदालत इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुई।

    खंडपीठ ने कहा कि उपलब्ध सामग्री से प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता और उसके अधिवक्ता ने जालसाजी और दस्तावेजों में हेरफेर से जुड़े अपराध किए हैं।

    चूंकि कथित अपराध न्यायालय के समक्ष कार्यवाही के दौरान हुआ है, इसलिए BNSS की धारा 379 के तहत सक्षम मजिस्ट्रेट, प्रयागराज के समक्ष शिकायत दर्ज कर आपराधिक कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए।

    अदालत ने याचिकाकर्ता और उसके अधिवक्ता के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का निर्देश देते हुए कहा कि चूंकि इस जनहित याचिका की शुरुआत ही प्रथम दृष्टया फर्जीवाड़े और कदाचार का परिणाम प्रतीत होती है, इसलिए इस याचिका पर आगे की सुनवाई फिलहाल स्थगित रखी जाएगी।

    अब मामले में आगे की कार्यवाही मजिस्ट्रेट के निर्णय के बाद ही की जाएगी।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

    Next Story