कोडीन कफ सिरप की बिक्री पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, हर मामले में NDPS Act के तहत FIR नहीं

Praveen Mishra

7 Sept 2026 12:51 PM IST

  • कोडीन कफ सिरप की बिक्री पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, हर मामले में NDPS Act के तहत FIR नहीं

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोडीन आधारित कफ सिरप की बिक्री से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि यदि कोई मेडिकल स्टोर अनुमत मात्रा में कोडीन युक्त कफ सिरप की सामान्य बिक्री बिना मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन के करता है, तो केवल इस आधार पर यह NDPS Act, 1985 के तहत अपराध नहीं बनता। ऐसी स्थिति में लाइसेंस संबंधी उल्लंघन होने पर कार्रवाई Drugs and Cosmetics Act के तहत की जा सकती है।

    हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि बहुत कम समय में बड़ी मात्रा में ऐसा कफ सिरप बेचा जाता है और परिस्थितियों से यह संकेत मिलता है कि दुकानदार को इसके औषधीय या वैज्ञानिक उपयोग के बजाय नशीले इस्तेमाल की जानकारी थी, तो मामला NDPS Act के दायरे में आ सकता है।

    यह टिप्पणी जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने कोडीन आधारित कफ सिरप के स्टॉक, बिक्री और परिवहन से जुड़े कई जमानत आवेदनों पर सुनवाई के दौरान की।

    क्या था मामला?

    एक Drug Inspector ने M/s Life Medical Store का निरीक्षण किया था। FIR में आरोप लगाया गया कि मेडिकल स्टोर के मालिक ने दो वर्षों में Codiva कफ सिरप की 800 बोतलें खरीदीं और 920 बोतलें बेचीं। हालांकि, Drug Inspector ने बाद में इन आंकड़ों को दो बार संशोधित किया—पहले 13 और फिर 45 बोतलों तक।

    जांच के दौरान पुलिस को 238 बोतलों की बिक्री का रिकॉर्ड मिला, जबकि शेष 558 बोतलों और 488 Puroxowin Spas capsules से संबंधित रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया गया।

    आवेदक की ओर से तर्क दिया गया कि मेडिकल स्टोर पर अत्यधिक भीड़ के दौरान हर बिक्री का प्रिस्क्रिप्शन रिकॉर्ड रखना हमेशा संभव नहीं होता। अधिक से अधिक यह लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन हो सकता है, लेकिन इसके आधार पर NDPS Act के तहत कार्रवाई उचित नहीं थी।

    राज्य की ओर से कहा गया कि उपलब्ध न कराए गए invoices Drugs and Cosmetics Act का उल्लंघन दिखाते हैं और कफ सिरप व capsules का इस्तेमाल नशे के लिए किया जा सकता था।

    हाईकोर्ट ने क्या कहा?

    कोर्ट ने कहा कि अनaccounted stock Drugs and Cosmetics Act के तहत उल्लंघन हो सकता है, लेकिन ऐसा कोई material सामने नहीं था जिससे यह साबित हो कि 558 बोतलें दो वर्षों के दौरान नशे के उद्देश्य से बेची गई थीं।

    कोर्ट ने इसे ऐसा मामला बताया जहां कथित अपराध प्रथम दृष्टया Drugs and Cosmetics Act के दायरे में आता है, फिर भी FIR NDPS Act के तहत दर्ज की गई।

    चूंकि आवेदक का कोई आपराधिक इतिहास नहीं था और चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी थी, कोर्ट ने उसे जमानत दे दी।

    Drug Inspectors को महत्वपूर्ण निर्देश

    हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के Commissioner, Food Safety and Drug Administration को निर्देश दिया कि सभी Drug Inspectors को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि मेडिकल स्टोर में लाइसेंस की शर्तों के उल्लंघन का मामला मिलने पर NDPS Act के तहत FIR दर्ज करने से पहले संबंधित DGC या JD (Prosecution) से कानूनी सलाह ली जाए।

    कोर्ट ने Drug Department के कामकाज पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कई मामलों में छोटे लाइसेंस उल्लंघनों पर भी NDPS Act के तहत FIR दर्ज की गई, जबकि FIR में अधूरे और अस्पष्ट तथ्य शामिल किए गए।

    कोर्ट ने यह भी कहा कि कई मामलों में Drug Inspectors ने FIR दर्ज करने से पहले लाइसेंसधारकों को पर्याप्त समय नहीं दिया, जिसके कारण बाद में जांच के दौरान जरूरी दस्तावेज पेश किए गए और कई मामलों में FIR की कहानी ही बदल गई।

    हाईकोर्ट ने Commissioner को इस पूरे मुद्दे की समीक्षा कर Drug Inspectors को FIR दर्ज करने की सही प्रक्रिया से अवगत कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश की प्रति अनुपालन के लिए Commissioner के कार्यालय भेजने का भी निर्देश दिया।

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    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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