महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, नागपुर में एनडीपीएस कानून पर राष्ट्रीय सम्मेलन, 2047 तक 'नशा-मुक्त भारत' का रोडमैप पेश
Praveen Mishra
15 April 2026 5:07 PM IST

महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, नागपुर द्वारा 10-11 अप्रैल 2026 को “Four Decades of the NDPS Act, 1985: Jurisprudential Evolution, Contemporary Challenges, and a Roadmap towards a Drug-Free India by 2047” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। सम्मेलन में देशभर के शीर्ष विधि विशेषज्ञों, प्रवर्तन अधिकारियों, शिक्षाविदों और विद्यार्थियों ने भाग लेते हुए मादक पदार्थ कानून से जुड़ी चुनौतियों और समाधान पर व्यापक चर्चा की।
उद्घाटन सत्र: 2047 तक नशा-मुक्त भारत केवल लक्ष्य नहीं, संवैधानिक प्रतिबद्धता
सम्मेलन का शुभारंभ सम्मेलन समन्वयक डॉ. त्रिशा मित्तल के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि
NDPS कानून के चार दशक पूरे होने के साथ अब उसके न्यायशास्त्र, संस्थागत ढांचे और समकालीन चुनौतियों पर गंभीर पुनर्विचार की आवश्यकता है।
मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) जी.एस. बाजपेयी (कुलपति, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली) ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए NDPS मामलों में जांच, ट्रायल और जमानत से जुड़ी जटिलताओं पर प्रकाश डाला।
वहीं, कुलपति प्रो. (डॉ.) विजेंद्र कुमार ने कहा:
“2047 तक नशा-मुक्त भारत कोई नारा नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है।”
पूर्ण सत्र I: ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग पर फोकस
पहले तकनीकी सत्र में अमित घावते (एनसीबी), मयंक माखिजा (ED) और सीमा जोशी (UNODC) ने भाग लिया।
अमित घावते ने NDPS कानून के प्रवर्तन और NCB की सप्लाई-डिमांड रिडक्शन रणनीति पर प्रकाश डाला
मयंक माखिजा ने NDPS और PMLA के कनेक्शन को समझाते हुए कहा कि ड्रग ट्रैफिकिंग मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी होती है
सीमा जोशी ने वैश्विक स्तर पर रोकथाम, उपचार और पुनर्वास आधारित दृष्टिकोण पर जोर दिया
पूर्ण सत्र II: नशा मुक्ति और पुनर्वास को प्राथमिकता
दूसरे सत्र में हर्ष पोद्दार, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और पुनर्वास केंद्र प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस सत्र में प्रमुख बातें सामने आईं:
नशे को केवल अपराध नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में देखने की जरूरत
युवाओं में बढ़ते नशे पर चिंता
पुनर्वास, काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के एकीकरण पर जोर
सामाजिक कलंक और पुनः लत (relapse) जैसी चुनौतियों पर चर्चा
पूर्ण सत्र III: NDPS मामलों में जांच, बचाव और न्यायिक संतुलन
तीसरे सत्र में विक्रम चौधरी, तनवीर अहमद मीर और समीर वानखेड़े शामिल हुए।
समीर वानखेड़े ने NDPS कानून के कठोर प्रावधानों और प्रवर्तन चुनौतियों को बताया
विक्रम चौधरी ने कहा कि बचाव पक्ष न्याय प्रणाली में संतुलन बनाए रखने का काम करता है
तनवीर मीर ने अनुच्छेद 21 के तहत निष्पक्ष प्रक्रिया और बचाव अधिकारों पर जोर दिया
सत्र में “fruit of the poisonous tree” सिद्धांत, साक्ष्य की शुचिता और पारदर्शिता जैसे महत्वपूर्ण कानूनी पहलुओं पर भी चर्चा हुई।
वेलिडिक्टरी सत्र: शोधकर्ताओं को सम्मान
समापन सत्र में:
शिवकुमार अय्यर को सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र पुरस्कार
गौरांगी बी. नाइक को द्वितीय स्थान
सम्मेलन का आयोजन संकाय और छात्र समन्वयकों के संयुक्त प्रयासों से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
निष्कर्ष
यह सम्मेलन NDPS कानून के 40 वर्षों के विकास, उसकी चुनौतियों और भविष्य की दिशा पर एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। इसमें यह स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया कि नशा-मुक्त भारत का लक्ष्य केवल सख्त कानूनों से नहीं, बल्कि समन्वित—कानूनी, सामाजिक और स्वास्थ्य आधारित दृष्टिकोण से ही प्राप्त किया जा सकता है।

