उत्तराखंड हाईकोर्ट का आदेश: ओन मेरिट सिद्धांत पर AIIMS ऋषिकेश में नर्सिंग पदोन्नति समीक्षा पर लगाई रोक
Amir Ahmad
13 May 2026 4:47 PM IST

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने AIIMS ऋषिकेश में नर्सिंग अधिकारियों की वर्ष 2022 और 2023 की पदोन्नति समीक्षा प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगाई। यह रोक विशेष रूप से ओन मेरिट सिद्धांत के आधार पर आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को अनारक्षित पदों पर पदोन्नति देने से जुड़े मामले में लगाई गई।
चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने यह आदेश नर्सिंग अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।
याचिकाकर्ताओं ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के 7 अप्रैल के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया गया।
हाइकोर्ट ने कहा कि अधिकरण ने यह कहते हुए राहत नहीं दी कि अभी तक कोई पदोन्नति नहीं हुई और याचिकाकर्ता संभावित कार्रवाई को पहले ही चुनौती दे रहे हैं। हालांकि अदालत ने माना कि समीक्षा विभागीय पदोन्नति समिति गठित करने के आदेश पहले ही जारी हो चुके हैं।
अदालत ने कहा,
“मुख्य मामला 20 मई 2026 को सुनवाई के लिए तय है। ऐसे में केंद्र सरकार के 30 सितंबर, 2016 के कार्यालय ज्ञापन को ध्यान में रखते हुए 'ओन मेरिट' सिद्धांत पर समीक्षा DPC की प्रक्रिया फिलहाल स्थगित रखी जानी चाहिए।”
याचिकाकर्ता AIIMS ऋषिकेश में सीनियर नर्सिंग अधिकारी और नर्सिंग अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने 10 मार्च, 2026 और 29 अगस्त, 2025 के उन आदेशों को चुनौती दी थी, जिनमें समीक्षा DPC आयोजित करने का निर्देश दिया गया।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यदि ओन मेरिट सिद्धांत के आधार पर समीक्षा डीपीसी की गई तो उनसे जूनियर आरक्षित वर्ग के अधिकारियों को अनारक्षित पदों पर पदोन्नति मिल सकती है।
उन्होंने अदालत को बताया कि यह पूरा मुद्दा फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। मामला जर्नैल सिंह बनाम लक्ष्मी नारायण गुप्ता से जुड़ा है, जिसमें ओन मेरिट के आधार पर आरक्षित वर्ग को अनारक्षित पदों पर पदोन्नति देने की वैधता पर सुनवाई चल रही है।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान तत्कालीन सॉलिसिटर जनरल ने आश्वासन दिया था कि अंतिम निर्णय तक आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को अनारक्षित पदों पर आगे कोई पदोन्नति नहीं दी जाएगी।
इसी आधार पर केंद्र सरकार के कार्मिक विभाग ने 30 सितंबर 2016 को कार्यालय ज्ञापन जारी कर ऐसी पदोन्नतियों पर रोक लगाई थी।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और AIIMS ऋषिकेश ने भी स्वीकार किया कि यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और वहां इस संबंध में आश्वासन दिया गया।
इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण का आदेश रद्द करते हुए कहा कि अधिकरण मुख्य मामले का अंतिम निर्णय करे। साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ताओं को अनावश्यक स्थगन न लेने की भी हिदायत दी।

