रजिस्ट्रार के वैधानिक आदेश पर हुई सेवा समाप्ति के खिलाफ रिट याचिका सुनवाई योग्य: उत्तराखंड हाईकोर्ट

Amir Ahmad

26 Jun 2026 5:46 PM IST

  • रजिस्ट्रार के वैधानिक आदेश पर हुई सेवा समाप्ति के खिलाफ रिट याचिका सुनवाई योग्य: उत्तराखंड हाईकोर्ट

    उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि यदि किसी सहकारी समिति के कर्मचारी की सेवा समाप्ति सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार या वैधानिक अधिकार का प्रयोग करने वाले अधिकारी के निर्देश पर की गई हो, तो उसके खिलाफ दायर रिट याचिका सुनवाई योग्य होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में यह नहीं कहा जा सकता कि याचिका केवल सहकारी समिति की कार्रवाई के विरुद्ध है।

    चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ विशेष अपील पर सुनवाई कर रही थी। यह अपील उस आदेश के खिलाफ दायर की गई, जिसमें एकल पीठ ने रिट याचिका को सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज किया।

    मामले में अपीलकर्ता सहकारी समिति में सहायक के पद पर कार्यरत था। उसने जिला सहायक निबंधक, सहकारी समितियां द्वारा जारी उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें समिति को उसकी नियुक्ति रद्द करने और उसे वेतन भुगतान के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का निर्देश दिया गया।

    जिला सहायक निबंधक के आदेश के अनुपालन में सहकारी समिति ने अपीलकर्ता की सेवाएं समाप्त कर दी थीं। इसी सेवा समाप्ति आदेश को भी याचिका में चुनौती दी गई।

    सिंगल बेंच ने यह कहते हुए याचिका खारिज की कि प्राथमिक सहकारी समिति संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत “राज्य” की परिभाषा में नहीं आती, इसलिए उसके खिलाफ रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।

    अपीलकर्ता की ओर से दलील दी गई कि उसकी सेवा समाप्ति का वास्तविक आधार जिला सहायक निबंधक द्वारा वैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी किया गया आदेश था। इसलिए मामले की वैधता की जांच हाइकोर्ट अपने रिट अधिकार क्षेत्र में कर सकता है।

    खंडपीठ ने पाया कि अपीलकर्ता की सेवाएं वास्तव में उत्तराखंड सहकारी समितियां अधिनियम, 2003 के तहत रजिस्ट्रार की शक्तियों का प्रयोग करते हुए जिला सहायक निबंधक द्वारा दिए गए निर्देशों के आधार पर समाप्त की गईं।

    अदालत ने कहा कि इस मामले में यह जांच करना आवश्यक है कि संबंधित अधिकारी ने जो निर्देश जारी किए, क्या वे वास्तव में अधिनियम के तहत प्राप्त शक्तियों के दायरे में थे और क्या उन शक्तियों का प्रयोग विधिसम्मत तरीके से किया गया।

    हाईकोर्ट ने कहा,

    “याचिका में उठा एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह था कि जिला सहायक निबंधक द्वारा जारी निर्देश अधिनियम के तहत उनकी शक्तियों के दायरे में थे या नहीं तथा मामले के तथ्यों में उन शक्तियों का प्रयोग वैध था या नहीं। इस प्रश्न की जांच रिट अदालत निश्चित रूप से कर सकती है।”

    खंडपीठ ने कहा कि इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि याचिका केवल सहकारी समिति की कार्रवाई के विरुद्ध थी।

    इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने एकल पीठ के आदेश से असहमति जताते हुए उसे रद्द किया और विशेष अपील स्वीकार की।

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