हाईकोर्ट ने नैनीताल मैदान में ईद की नमाज़ की इजाज़त देने के आदेश के खिलाफ राज्य की अपील खारिज की

Shahadat

30 May 2026 8:03 PM IST

  • हाईकोर्ट ने नैनीताल मैदान में ईद की नमाज़ की इजाज़त देने के आदेश के खिलाफ राज्य की अपील खारिज की

    उत्तराखंड हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच ने शुक्रवार को राज्य द्वारा दायर विशेष अपील को 'आगे न बढ़ाने' (not pressed) के आधार पर खारिज किया। इस अपील में सिंगल-जज के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें नैनीताल के मशहूर जिमखाना और डिस्ट्रिक्ट स्पोर्ट्स एसोसिएशन के मैदान में ईद-उल-अज़हा (बकरीद) की नमाज़ पढ़ने की इजाज़त दी गई थी।

    जब 29 मई को चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की बेंच के सामने इस मामले की सुनवाई हुई तो राज्य की ओर से पेश हुए स्टैंडिंग काउंसिल BPS मेर ने बताया कि वे इस अपील को आगे नहीं बढ़ा रहे हैं। इस तरह यह याचिका खारिज की गई।

    उल्लेखनीय है कि इस अपील पर सुनवाई तब हुई, जब 28 मई को तय धार्मिक सभा पहले ही खत्म हो चुकी थी। इस वजह से राज्य की अपील असल में बेमानी हो गई थी।

    बता दें, इस विशेष अपील में जस्टिस पंकज पुरोहित द्वारा 27 मई को दिए गए आदेश को चुनौती दी गई थी। सिंगल-जज ने 28 मई को सुबह 09:00 बजे से 10:00 बजे तक 'द फ्लैट्स' मैदान पर 'शांतिपूर्वक' नमाज़ पढ़ने की इजाज़त दी थी।

    सिंगल-जज ने प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया था कि वे ज़रूरत के हिसाब से कानून-व्यवस्था को सख्ती से बनाए रखें।

    27 मई का आदेश अंजुमन इस्लामिया नैनीताल द्वारा दायर याचिका पर दिया गया। अंजुमन की ओर से उसके सचिव मिस्टर जमाल ने यह याचिका दायर की थी। इस याचिका में प्रतिवादी नंबर 6 (नैनीताल जिमखाना और डिस्ट्रिक्ट स्पोर्ट्स एसोसिएशन) द्वारा जारी एक रद्द करने वाले पत्र को चुनौती दी गई थी। यह संस्था संबंधित मैदान का प्रबंधन करती है और उसने याचिकाकर्ता-सोसायटी तथा उसके सदस्यों को मैदान में नमाज़ पढ़ने की इजाज़त देने से इनकार किया था।

    सिंगल-जज के सामने याचिकाकर्ता सोसायटी ने यह दलील दी थी कि पिछले 100 सालों से लगातार नमाज़ पढ़ी जा रही है। इससे नैनीताल में कभी भी कानून-व्यवस्था की कोई समस्या पैदा नहीं हुई।

    यह भी बताया गया कि यह पहली बार है, जब याचिकाकर्ता सोसायटी को उस मैदान में नमाज़ पढ़ने की इजाज़त देने से इनकार किया गया।

    दूसरी ओर, ज़िला प्रशासन ने यह दलील दी कि यह मैदान शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में से एक में स्थित है। पर्यटन के मौसम के चलते हर दिन लगभग 50,000 पर्यटक यहां आ रहे हैं। आगे यह भी कहा गया कि उस जगह पर नमाज़ पढ़ने की इजाज़त देने से क़ानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है और शहर की सांप्रदायिक सद्भावना पर बुरा असर पड़ सकता है, क्योंकि उन फ़्लैट्स के पास ही एक हिंदू मंदिर और एक गुरुद्वारा भी मौजूद है।

    हालांकि, अदालत ने इस बात पर ध्यान दिया कि पिछले 100 सालों से उस मैदान में हमेशा सांप्रदायिक सद्भावना के साथ नमाज़ पढ़ी जाती रही है। नैनीताल में ईद-उल-अज़हा के दौरान अब तक किसी भी अप्रिय घटना के होने की कोई जानकारी नहीं मिली है।

    इसे देखते हुए बेंच ने याचिकाकर्ता सोसाइटी और उसके सदस्यों को उस जगह पर एक घंटे तक शांतिपूर्वक नमाज़ पढ़ने की इजाज़त दी।

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