दशकों तक नियमित काम लेने के बाद अस्थायी कर्मचारी को मनमाने ढंग से नहीं हटा सकती सरकार: उड़ीसा हाईकोर्ट
Praveen Mishra
29 Jun 2026 6:05 PM IST

उड़ीसा हाईकोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार किसी व्यक्ति से वर्षों तक नियमित प्रकृति का काम लेने के बाद केवल यह कहकर उसे अचानक सेवा से नहीं हटा सकती कि वह गैर-स्वीकृत (Non-Sanctioned) अस्थायी पद पर संविदा के आधार पर कार्यरत था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक या वित्तीय बाधाओं का हवाला देकर कर्मचारियों को लंबे समय तक रोजगार की असुरक्षा में नहीं रखा जा सकता।
जस्टिस दीक्षित कृष्ण श्रीपाद और जस्टिस चित्तरंजन दास की खंडपीठ ने 14 वर्षों तक लगातार सेवा देने के बाद बर्खास्त की गई एक महिला फार्मासिस्ट को राहत देने वाले एकलपीठ के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि राज्य का संवैधानिक दायित्व है कि वह अस्थायी या संविदा कर्मचारियों से स्थायी प्रकृति का कार्य लेकर उन्हें अनिश्चितकाल तक असुरक्षित स्थिति में न रखे।
मामले में महिला को वर्ष 2006 में फार्मासिस्ट फेलो के रूप में नियुक्त किया गया था और वह 2020 तक कार्यरत रहीं। इसके बावजूद नियमितीकरण के उनके अनुरोध लंबित रहे और बाद में यह कहते हुए उनकी सेवा समाप्त कर दी गई कि वह गैर-स्वीकृत पद पर कार्यरत थीं।
हाईकोर्ट ने पाया कि संबंधित सरकारी संकल्प के अनुसार छह वर्ष की संतोषजनक संविदा सेवा पूरी होने पर कर्मचारी को नियमित नियुक्त माना जाना चाहिए था, लेकिन अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि राज्य अपने ही निष्क्रिय रवैये का लाभ नहीं उठा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी और तीन महीने के भीतर महिला की सेवा समाप्ति रद्द करने तथा नियमितीकरण पर पुनर्विचार करने के एकलपीठ के निर्देश का पालन करने का आदेश दिया।

