'पब्लिसिटी पाने की कोशिश': 2003 के 'खराब मोबाइल' मामले में मुकेश अंबानी के खिलाफ केस उड़ीसा हाईकोर्ट ने किया रद्द
Praveen Mishra
9 April 2026 3:52 PM IST

ओडिशा हाईकोर्ट ने वर्ष 2003 के एक मामूली उपभोक्ता विवाद में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) और उसके चेयरमैन मुकेश धीरूभाई अंबानी के खिलाफ दायर आपराधिक शिकायत और समन आदेश को रद्द कर दिया है।
डॉ. जस्टिस संजीब कुमार पाणिग्रही की पीठ ने कहा कि यह मामला “अदालत की प्रक्रिया का सुनियोजित दुरुपयोग” है और इसे प्रचार पाने के उद्देश्य से दायर किया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी प्रसिद्ध व्यक्ति को केवल ध्यान आकर्षित करने के लिए आपराधिक मामले में घसीटना उचित नहीं है।
मामला क्या था
शिकायतकर्ता प्रफुल्ल कुमार मिश्रा ने 2003 में “कर लो दुनिया मुट्ठी में” योजना के तहत 501 रुपये में मोबाइल लिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि हैंडसेट खराब था और सेवाएं ठीक से नहीं मिलीं।
उन्होंने इसी मुद्दे पर चार बार शिकायत दायर की—पहली तीन शिकायतें पहले ही हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज की जा चुकी थीं।
अदालत की अहम टिप्पणियां
अदालत ने कहा कि—
बार-बार एक ही मामले में शिकायत दायर करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है
शिकायतकर्ता ने पहले के मुकदमों की जानकारी छुपाई
मुकेश अंबानी का इस लेन-देन से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था
अदालत ने यह भी कहा कि यदि ऐसे मामलों को अनुमति दी जाए, तो हर छोटी समस्या के लिए बड़े पदाधिकारियों को आरोपी बनाया जा सकता है, जो कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है।
फैसला
अदालत ने—
आपराधिक शिकायत और समन आदेश रद्द किए
आरआईएल और मुकेश अंबानी को सभी आरोपों से मुक्त किया
शिकायतकर्ता पर 1000 रुपये का जुर्माना लगाया
साथ ही, अदालत ने कहा कि यदि कोई दावा बनता है, तो उसे सिविल या उपभोक्ता मंच पर उठाया जाना चाहिए, न कि आपराधिक मामले के रूप में।

