असम सीएम की पत्नी के 'पासपोर्ट' पर विवाद: हाईकोर्ट ने पवन खेड़ा की अग्रिम ज़मानत याचिका पर सुरक्षित रखा फ़ैसला
Shahadat
9 April 2026 3:56 PM IST

तेलंगाना हाईकोर्ट ने गुरुवार (9 अप्रैल) को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम ज़मानत याचिका पर अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया। यह याचिका असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज FIR के सिलसिले में दायर की गई थी, जिसमें उन पर कई पासपोर्ट रखने के आरोप लगाए गए।
जस्टिस के. सुजाना शुक्रवार को इस मामले पर अपना फ़ैसला सुना सकती हैं।
अग्रिम ज़मानत याचिका हैदराबाद में दायर की गई, जहां खेड़ा का निवास स्थान है।
खेड़ा की ओर से पेश हुए सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि मानहानि जैसे कथित अपराध के लिए FIR में "हर उस संभावित अपराध का ज़िक्र किया गया, जिसकी कोई कल्पना भी कर सकता है।"
उन्होंने तर्क दिया कि इससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि यह आपराधिक कार्रवाई किसी मकसद से प्रेरित है और इसमें राजनीतिक बदले की बू आती है।
उन्होंने कहा,
"आप अपने राजनीतिक विरोधियों से राजनीतिक तौर पर नहीं, बल्कि क़ानून के दुर्भावनापूर्ण और अनुचित दुरुपयोग के ज़रिए लड़ रहे हैं। क्योंकि आप मेरी आवाज़ दबाना चाहते हैं... यह कार्रवाई अनुपातहीन है... असल में शिकायतकर्ता कोई और नहीं, बल्कि असम के माननीय सीएम ही हैं।"
बता दें, यह FIR गुवाहाटी क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में BNS की धाराओं 175 (चुनाव के संबंध में झूठा बयान), 35, 36, 318 (धोखाधड़ी), 338 (कीमती वसीयत, प्रतिभूति आदि की जालसाज़ी), 337 (अदालत के रिकॉर्ड या सार्वजनिक रजिस्टर आदि की जालसाज़ी), 340 (जाली दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाना और उसे असली के तौर पर इस्तेमाल करना), 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना) और 356 (मानहानि) के तहत दर्ज की गई।
सिंघवी ने आगे कहा कि इस घटना से जुड़े सभी सबूत डिजिटल रूप में मौजूद हैं, इसलिए खेड़ा की गिरफ़्तारी ज़रूरी नहीं है।
सिंघवी ने कहा,
"दिशानिर्देशों के अनुसार, आपको मुझे नोटिस देना चाहिए और गिरफ़्तारी की आवश्यकता साबित करनी चाहिए। इस पूरी कार्रवाई में दुर्भावना साफ़ झलकती है... आख़िर आप इस तरह के मामले में किसी को गिरफ़्तार क्यों करना चाहेंगे? मैं किन दस्तावेज़ों के साथ छेड़छाड़ कर सकता हूं? मैं एक जानी-मानी राजनीतिक हस्ती हूँ। मैं आपका राजनीतिक विरोधी ज़रूर हूँ, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैं कोई आदतन अपराधी हूँ। समाज में मेरी गहरी जड़ें हैं। मेरे भागने का कोई ख़तरा नहीं है।"
दूसरी ओर, असम पुलिस की तरफ से पेश हुए असम के एडवोकेट जनरल देवजीत सैकिया ने हैदराबाद में अग्रिम ज़मानत याचिका की स्वीकार्यता को चुनौती दी। उन्होंने दलील दी कि दिल्ली के रहने वाले खेड़ा ने ऐसा कोई कारण नहीं बताया कि वह असम आकर वहां अग्रिम ज़मानत के लिए अर्जी क्यों नहीं दे सकते।
एजी ने कहा,
"कोई मेडिकल इमरजेंसी नहीं है... वे देश के किसी भी हिस्से से असम में अग्रिम ज़मानत के लिए अर्जी दे सकते हैं।"
एजी ने आगे तर्क दिया कि खेड़ा के "भाग जाने का पक्का अंदेशा" है, क्योंकि "जब पुलिस उनके पास गई तो वह भाग गए... वह दिल्ली जा सकते थे, क्योंकि वह उनका रहने का स्थान है। इसके बजाय वह हैदराबाद में हैं... कल अगर पुलिस वहां पहुंचती है तो वह चेन्नई भाग जाएंगे..."
इसका विरोध करते हुए खेड़ा की तरफ से पेश हुए एक अन्य वकील ने दलील दी कि याचिका हैदराबाद में इसलिए दायर की गई, क्योंकि खेड़ा का परिवार और घर यहीं है।
उन्होंने कहा,
"हमने उनकी पत्नी का आधार कार्ड दिखाया है। उन्होंने सनतनगर निर्वाचन क्षेत्र (तेलंगाना में) से चुनाव लड़ा है।"
एजी ने आगे तर्क दिया कि खेड़ा के राजनीतिक बदले के आरोप बेबुनियाद हैं, क्योंकि शिकायतकर्ता कोई राजनीतिक व्यक्ति या प्रतिद्वंद्वी नहीं है। उन्होंने यह भी दलील दी कि जालसाज़ी के प्रावधान इसलिए लगाए गए, क्योंकि खेड़ा ने कथित तौर पर रिंकी शर्मा पर आरोप लगाने के लिए "नकली, जाली" दस्तावेजों का इस्तेमाल किया।
उन्होंने कहा,
"किसी महिला को इस तरह बदनाम नहीं किया जा सकता।"
खेड़ा ने गुहार लगाई कि अगर उन्हें गिरफ्तार किया जाता है तो उन्हें ज़मानत पर रिहा कर दिया जाए।
मंगलवार को असम पुलिस खेड़ा की तलाश में तेलंगाना के हैदराबाद पहुंची थी। कांग्रेस नेता ने दावा किया है कि असम के मुख्यमंत्री की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा के पास तीन पासपोर्ट हैं। खेड़ा कांग्रेस पार्टी के मीडिया और प्रचार विभाग के अध्यक्ष हैं और कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य भी हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, असम पुलिस ने दिल्ली में खेड़ा के घर का भी दौरा किया और वहां तलाशी ली थी।
Case title: Pawan Khera v/s The State of Telangana

