लंबित आपराधिक मामले में ट्रायल कोर्ट के NOC बिना पासपोर्ट री-इश्यू नहीं होगा: तेलंगाना हाईकोर्ट

Praveen Mishra

30 March 2026 5:47 PM IST

  • लंबित आपराधिक मामले में ट्रायल कोर्ट के NOC बिना पासपोर्ट री-इश्यू नहीं होगा: तेलंगाना हाईकोर्ट

    तेलंगाना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिन व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं, वे पासपोर्ट के नवीनीकरण या पुनः जारी करने के लिए सीधे आवेदन नहीं कर सकते। ऐसे मामलों में पहले संबंधित ट्रायल कोर्ट से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) प्राप्त करना अनिवार्य है।

    यह निर्णय जस्टिस नागेश भीमपाका ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें एक शोध वैज्ञानिक ने पासपोर्ट पुनः जारी न किए जाने को चुनौती दी थी।

    मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता अमेरिका में कार्यरत है और उसके खिलाफ उसकी पत्नी द्वारा IPC की धारा 498A, 406, 506 तथा दहेज निषेध अधिनियम के तहत आपराधिक मामला दर्ज है। उसने अदालत में दलील दी कि केवल आपराधिक मामला लंबित होने के आधार पर पासपोर्ट जारी करने से इनकार करना उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। उसने यह भी बताया कि भारत यात्रा के दौरान उसका पासपोर्ट खो गया था और उसे अपने कार्य पर लौटने के लिए तत्काल नए पासपोर्ट की आवश्यकता है।

    वहीं, केंद्र सरकार और पासपोर्ट प्राधिकरण ने अदालत को बताया कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 6(2)(f) के तहत, लंबित आपराधिक मामलों में पासपोर्ट जारी करने से पहले ट्रायल कोर्ट की अनुमति आवश्यक है। याचिकाकर्ता की पत्नी ने भी इसका विरोध करते हुए आशंका जताई कि पासपोर्ट मिलने पर वह देश छोड़कर न्यायिक प्रक्रिया से बच सकता है।

    अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही लंबित है और चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। ऐसे में कानून के तहत उसे पहले ट्रायल कोर्ट से NOC प्राप्त करना होगा। कोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट प्राधिकरण को सीधे पासपोर्ट जारी करने का निर्देश देना वैधानिक प्रावधानों के विपरीत होगा।

    हालांकि, याचिकाकर्ता की पेशेवर स्थिति को ध्यान में रखते हुए अदालत ने उसे ट्रायल कोर्ट में तुरंत आवेदन करने की स्वतंत्रता दी और निर्देश दिया कि उस आवेदन पर शीघ्र, संभव हो तो उसी दिन, निर्णय लिया जाए।

    कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पासपोर्ट के लिए NOC मिल जाने का अर्थ विदेश यात्रा की अनुमति नहीं है। विदेश जाने के लिए अलग से न्यायालय की अनुमति लेना आवश्यक होगा।

    इसी के साथ अदालत ने याचिका का निस्तारण कर दिया।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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