तेलंगाना हाईकोर्ट: पत्नी को पति के पास जाने से रोकने का आदेश रद्द, कहा—“अभूतपूर्व”

  • तेलंगाना हाईकोर्ट: पत्नी को पति के पास जाने से रोकने का आदेश रद्द, कहा—“अभूतपूर्व”

    तेलंगाना हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पत्नी को तलाक कार्यवाही के दौरान अपने पति, उसके घर और कार्यस्थल के पास जाने से पूरी तरह रोक दिया गया था।

    जस्टिस शुमी भट्टाचार्य और जस्टिस गाडि प्रवीण कुमार की खंडपीठ ने कहा कि यह आदेश “अभूतपूर्व” है और किसी व्यक्ति की आवाजाही पर इस तरह की रोक लगाने के लिए बहुत ठोस और विश्वसनीय कारण होने चाहिए, जो इस मामले में मौजूद नहीं थे।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ इस आधार पर कि पत्नी ने पति के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए हैं या सोशल मीडिया पर बयान दिए हैं, ऐसी सख्त पाबंदी नहीं लगाई जा सकती। वैवाहिक विवादों को आपराधिक मामलों की तरह नहीं माना जा सकता।

    यह मामला Hindu Marriage Act, 1955 (हिंदू विवाह अधिनियम, 1955) के तहत दायर तलाक याचिका से जुड़ा था, जिसमें पति ने पत्नी पर क्रूरता और मानसिक बीमारी के आरोप लगाए थे। इसी आधार पर उसने पत्नी को अपने पास आने से रोकने की मांग की थी, जिसे फैमिली कोर्ट ने मान लिया।

    हाईकोर्ट ने पाया कि फैमिली कोर्ट ने केवल पति के आरोपों पर भरोसा किया और पत्नी के पक्ष या उसके बचाव पर गंभीरता से विचार नहीं किया। साथ ही, पत्नी ने वैवाहिक अधिकारों की पुनर्स्थापना की मांग भी की थी, जिसे नजरअंदाज कर दिया गया।

    अदालत ने कहा कि इस तरह का आदेश बिना सुनवाई के ही पत्नी को दोषी ठहराने जैसा है। इसलिए हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को अवैध बताते हुए पत्नी की अपील स्वीकार कर ली और सभी पाबंदियां हटा दीं।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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