ट्रस्ट कोई 'कानूनी व्यक्ति' नहीं, इसलिए उसे आरोपी नहीं बनाया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
Shahadat
16 Sept 2026 11:31 AM IST

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि 'ट्रस्ट' कोई कानूनी व्यक्ति (Juristic Person) नहीं है और न तो वह किसी पर मुकदमा कर सकता है और न ही उस पर मुकदमा किया जा सकता है। कोर्ट ने कर्नाटक में वित्तीय अनियमितता के एक मामले में आरोपी बनाए गए एक ट्रस्ट के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द की।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने 'प्रतिभा प्रतिष्ठान बनाम मैनेजर, केनरा बैंक (2017)' मामले में दिए गए फैसले का समर्थन करते हुए कहा,
"...ट्रस्ट का अपना कोई अलग कानूनी अस्तित्व नहीं होता है, जिससे वह मुकदमा करने या उस पर मुकदमा किए जाने में असमर्थ होता है। यह केवल संपत्ति के मालिकाना हक से जुड़ी एक जिम्मेदारी है जो किसी दूसरे व्यक्ति, या किसी दूसरे व्यक्ति और मालिक के फायदे के लिए मालिक द्वारा जताए गए और स्वीकार किए गए भरोसे से पैदा होती है। मुकदमे लड़ने या बचाव करने की जिम्मेदारी ट्रस्टी की होती है, न कि खुद ट्रस्ट की।"
कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द किया, जिसमें अपीलकर्ता-ट्रस्ट के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इनकार किया गया।
कोर्ट ने कहा,
"...ट्रस्ट को आरोपी नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि इसे कानूनी व्यक्ति (Juristic Person) नहीं माना जा सकता है।"
सुप्रीम कोर्ट के सामने राज्य ने आपराधिक कार्यवाही में अपीलकर्ता-ट्रस्ट को आरोपी न बनाए जाने के खिलाफ तर्क दिया। अदालत ने कहा कि 'शंकर पदम थापा बनाम विजयकुमार दिनेशचंद्र अग्रवाल' (2025 LiveLaw (SC) 991) मामले में दिए गए फैसले का इस्तेमाल इस मामले में नहीं किया जा सकता।
अपील करने वाले ट्रस्ट ने उस फैसले का हवाला देते हुए ट्रस्टियों के खिलाफ चेक बाउंस होने की कार्यवाही की अनुमति मांगी थी, जबकि ट्रस्ट को आरोपी नहीं बनाया गया। मौजूदा मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) और 'कर्नाटक प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट ऑफ डिपॉजिटर्स इन फाइनेंशियल एस्टेब्लिशमेंट्स एक्ट, 2004' के तहत कथित अपराध शामिल हैं।
राज्य की दलील को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भले ही यह सवाल कि क्या ट्रस्ट एक 'ज्यूरिस्टिक पर्सन' (कानूनी व्यक्ति) है या नहीं, एक बड़ी बेंच के पास विचाराधीन है, लेकिन 'प्रतिभा प्रतिष्ठान' मामले में तय किया गया कानूनी सिद्धांत (जिसे बाद में 'शंकर पदम थापा' मामले में भी माना गया) इस स्पष्ट निष्कर्ष पर ले जाता है कि ट्रस्ट कोई 'ज्यूरिस्टिक पर्सन' नहीं है; इसलिए न तो उस पर मुकदमा किया जा सकता है और न ही वह किसी पर मुकदमा कर सकता है।
इसके आधार पर अपील को इस हद तक स्वीकार कर लिया गया कि अपील करने वाले ट्रस्ट के खिलाफ कार्यवाही रद्द कर दी गई, लेकिन ट्रस्टियों के खिलाफ चल रही कार्यवाही में कोई बदलाव नहीं किया गया।
Cause Title: Madasa Masih-UI-Uloom Educational and Charitable Trust Versus State of Karnataka & Ors.


