PMLA पुनर्विचार: सुप्रीम कोर्ट 6 मार्च को विजय मदनलाल चौधरी फैसले पर सुनवाई करेगा

Praveen Mishra

3 March 2025 9:43 PM IST

  • PMLA पुनर्विचार: सुप्रीम कोर्ट 6 मार्च को विजय मदनलाल चौधरी फैसले पर सुनवाई करेगा

    सुप्रीम कोर्ट 6 मार्च को विजय मदनलाल चौधरी फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जिसने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के विभिन्न प्रावधानों को बरकरार रखा था।

    गौरतलब है कि जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस सी.टी. रविकुमार (अब रिटायर्ड) और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। हालांकि, जस्टिस रविकुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद, खंडपीठ के पुनर्गठन की आवश्यकता उत्पन्न हुई।

    पहले, इन याचिकाओं को 7 अगस्त 2024 को सूचीबद्ध किया गया था, लेकिन तब से सुनवाई लगातार टलती रही। अब यह मामला 6 मार्च को जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस न. कोटिस्वर सिंह की दो-जजों की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है।

    मामले की पृष्ठभूमि:

    यह फैसला 27 जुलाई 2022 को जस्टिस ए.एम. खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सी.टी. रविकुमार की खंडपीठ द्वारा दिया गया था। इस निर्णय में धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) के कुछ प्रमुख प्रावधानों को बरकरार रखा गया, जिनमें शामिल हैं—

    1. धारा 5, 8(4), 15, 17 और 19 – प्रवर्तन निदेशालय (ED) को गिरफ्तारी, कुर्की, तलाशी और जब्ती की शक्तियां प्रदान करती हैं।

    2. धारा 24 – इसमें अभियुक्त पर दोषमुक्ति का बोझ उलटकर अभियोजन पक्ष को नहीं, बल्कि आरोपी को निर्दोष साबित करने की जिम्मेदारी दी गई। कोर्ट ने कहा कि यह प्रावधान अधिनियम के उद्देश्यों से “उचित रूप से संबंधित” है।

    3. धारा 45 – यह जमानत के लिए “दोहरे-शर्तों” का प्रावधान करता है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले निकेश ताराचंद शाह मामले में इस प्रावधान को असंवैधानिक ठहराया था, लेकिन 2018 में संसद ने इसमें संशोधन किया, जिसे इस फैसले में सही ठहराया गया।

    पुनर्विचार याचिकाएं और उनकी सुनवाई

    इस निर्णय के बाद कुल 8 पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गईं। चूंकि जस्टिस खानविलकर सेवानिवृत्त हो चुके थे, इसलिए तत्कालीन चीफ जस्टिस एन.वी. रमना ने इन याचिकाओं की सुनवाई के लिए खंडपीठ का नेतृत्व किया।

    25 अगस्त 2022 को, CJI रमना की पीठ ने नोटिस जारी करते हुए मौखिक रूप से कहा कि फैसले के कम से कम दो निष्कर्षों पर पुनर्विचार की आवश्यकता है—

    1. ECIR की प्रति आरोपी को न देना – (ECIR मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में एफआईआर के समकक्ष होता है)।

    2. निर्दोषता की धारणा को पलटना – यानी आरोपी को खुद को निर्दोष साबित करना होगा।

    इसके बाद, कोर्ट ने इन पुनर्विचार याचिकाओं की ओपन कोर्ट में सुनवाई की अनुमति दी।

    जब से नोटिस जारी हुआ, तब से इस मामले की सुनवाई 7 अगस्त को पहली बार सूचीबद्ध हुई। लेकिन सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले की तैयारी के लिए समय मांगा, जिसके कारण सुनवाई स्थगित हो गई। बाद में, यह मामला 18 सितंबर को सूचीबद्ध किया गया, फिर 16 अक्टूबर के लिए पुनः सूचीबद्ध हुआ। लेकिन उस दिन जस्टिस सूर्य कांत के अवकाश पर होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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