युवा वकीलों के लिए सहायता कोष बनाने पर सुप्रीम कोर्ट का सुझाव, महिला वकीलों के लिए बेहतर सुविधाओं की भी मांग
Praveen Mishra
19 Jun 2026 1:42 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को युवा वकीलों के लिए "यंग लॉयर्स प्रोफेशनल असिस्टेंस फंड" बनाने का सुझाव दिया और कहा कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण कई प्रतिभाशाली अधिवक्ता शुरुआती वर्षों में मुकदमेबाजी का पेशा छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।
चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहन की खंडपीठ महिला अधिवक्ताओं द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अदालत परिसरों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और युवा वकीलों की आर्थिक चुनौतियों का मुद्दा उठाया गया है।
अदालत ने कहा कि नए वकीलों के पास शुरुआत में न तो स्थायी आय होती है और न ही अपना क्लाइंट बेस। ऐसे में प्रथम पीढ़ी के वकीलों और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले अधिवक्ताओं के लिए मुकदमेबाजी में टिके रहना कठिन हो जाता है।
पीठ ने सुझाव दिया कि हाईकोर्टों या किसी स्वायत्त निकाय के नियंत्रण में एक विशेष कोष बनाया जाए, जिससे पात्र युवा वकीलों को शुरुआती वर्षों में मासिक स्टाइपेंड दिया जा सके। अदालत ने यह भी कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता, कोर्ट फीस का एक हिस्सा और न्यायालयों द्वारा लगाए गए कॉस्ट की राशि इस कोष में योगदान के स्रोत हो सकते हैं।
सुनवाई के दौरान महिला अधिवक्ताओं के लिए अदालत परिसरों में स्वच्छ शौचालय, बार रूम और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसी सुविधाएं केवल सुविधा का विषय नहीं बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा और सम्मानजनक जीवन के अधिकार से जुड़ी हैं।
मामले में अदालत ने अटॉर्नी जनरल और राज्यों के एडवोकेट जनरल्स से सहायता मांगी है तथा कहा है कि उसके सुझाव फिलहाल प्रारंभिक और विचारार्थ हैं।

