'वेटलैंड' की परिभाषा पर सुप्रीम कोर्ट में सवाल, 2017 नियमों की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस
Praveen Mishra
26 May 2026 5:01 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को वेटलैंड्स (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 में “वेटलैंड” की परिभाषा को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने फिलहाल केवल इस मुद्दे पर नोटिस जारी किया कि नियम 2(g) में दी गई वेटलैंड की परिभाषा “अस्पष्ट” (vague) है या नहीं।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका पर सुनवाई की।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि 2017 के नियमों ने वेटलैंड्स को मिलने वाली पर्यावरणीय सुरक्षा को काफी कमजोर कर दिया है। उन्होंने कहा कि नई परिभाषा के कारण कई पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र संरक्षण के दायरे से बाहर हो गए हैं।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि पहले जिन 99 वेटलैंड क्षेत्रों को संरक्षण मिला हुआ था, उनमें से 44 क्षेत्र नई परिभाषा के चलते तुरंत सुरक्षा से बाहर हो गए। उन्होंने यह भी कहा कि देशभर में एक लाख से अधिक वेटलैंड्स प्रभावित हो सकते हैं और पक्षी अभयारण्यों तक की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
याचिका में कहा गया है कि नियम 2(g) के तहत नदी चैनल, धान के खेत, पीने के पानी के लिए बनाए गए जलाशय, सिंचाई, मत्स्य पालन और अन्य मानव निर्मित जल संरचनाओं को वेटलैंड की परिभाषा से बाहर रखा गया है, जिससे कई जल निकाय कानूनी संरक्षण से वंचित हो रहे हैं।
हालांकि जस्टिस बागची ने कहा कि केवल इसलिए कि पहले के सुप्रीम कोर्ट के फैसले 2010 की परिभाषा पर आधारित थे, सरकार नई परिभाषा नहीं बना सकती—ऐसा नहीं कहा जा सकता। लेकिन कोर्ट ने यह भी माना कि परिभाषा की स्पष्टता को लेकर चिंता का विषय है।
कोर्ट ने कहा कि फिलहाल वह केवल इस पहलू पर विचार करेगा कि क्या वेटलैंड की वर्तमान परिभाषा अत्यधिक अस्पष्ट है।
याचिका में मांग की गई है कि वेटलैंड्स नियम, 2017 के नियम 2(g) को संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का उल्लंघन बताते हुए असंवैधानिक घोषित किया जाए।

