DGP नियुक्ति में देरी पर सख्त सुप्रीम कोर्ट: समय पर प्रस्ताव न भेजने वाले राज्यों के खिलाफ UPSC चला सकेगा अवमानना कार्यवाही

Praveen Mishra

5 Feb 2026 3:26 PM IST

  • DGP नियुक्ति में देरी पर सख्त सुप्रीम कोर्ट: समय पर प्रस्ताव न भेजने वाले राज्यों के खिलाफ UPSC चला सकेगा अवमानना कार्यवाही

    सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि राज्य सरकारों को पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को प्रस्ताव भेजने में अनावश्यक देरी नहीं करनी चाहिए।

    अदालत ने कई राज्यों में 'कार्यवाहक/अध hoc DGP' नियुक्त करने की प्रवृत्ति पर असंतोष जताते हुए UPSC को यह अधिकार दिया कि वह राज्यों को समय पर प्रस्ताव भेजने के लिए रिमाइंडर भेजे। यदि इसके बावजूद राज्य सरकारें डिफॉल्ट करती हैं, तो UPSC को अवमानना कार्यवाही शुरू करने की स्वतंत्रता होगी।

    अदालत ने याद दिलाया कि प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ (2006) मामले में यह निर्देश दिया गया था कि राज्य का DGP, UPSC द्वारा पैनल में शामिल किए गए विभाग के तीन सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में से चुना जाएगा। वहीं 2018 के निर्देशों के अनुसार, राज्यों को मौजूदा DGP के सेवानिवृत्त होने से कम-से-कम तीन महीने पहले UPSC को प्रस्ताव भेजना अनिवार्य है, ताकि आयोग पैनल तैयार कर सके।

    हालांकि, राज्यों द्वारा समय पर प्रस्ताव न भेजे जाने के कारण कई जगहों पर कार्यवाहक DGP नियुक्त किए जा रहे हैं। UPSC ने अदालत को बताया कि इससे योग्य और वरिष्ठ अधिकारियों को DGP पद के लिए विचार किए जाने का अवसर नहीं मिल पाता।

    UPSC की आपत्तियों का समर्थन करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा—

    “हम UPSC द्वारा उठाई गई चिंताओं से पूर्णतः सहमत हैं। प्रकाश सिंह मामले के निर्देशों का उल्लंघन न हो, इसके लिए हम UPSC को यह अधिकार देते हैं कि वह राज्यों को नियमित DGP की नियुक्ति के लिए समय पर प्रस्ताव भेजने को कहे। यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो UPSC इस न्यायालय में उचित आवेदन दायर कर सकता है। देरी के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय की जाएगी।”

    यह आदेश चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने उस याचिका पर दिया, जो UPSC ने तेलंगाना हाईकोर्ट के उस निर्देश के खिलाफ दायर की थी, जिसमें DGP चयन प्रक्रिया चार सप्ताह में पूरी करने को कहा गया था।

    सुनवाई के दौरान CJI ने टिप्पणी की कि यदि UPSC की आपत्ति मान ली जाती, तो तेलंगाना में कोई सक्रिय DGP ही नहीं रहता। उन्होंने UPSC से पूछा कि उसने पहले राज्य के खिलाफ अवमानना याचिका क्यों नहीं दायर की।

    अंततः, कोर्ट ने UPSC को हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करने के लिए चार सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि UPSC की आपत्तियाँ कहीं-न-कहीं राज्यों को नियमित DGP नियुक्त न करने में अप्रत्यक्ष रूप से मदद कर रही हैं, जो प्रकाश सिंह मामले की भावना के विपरीत है।

    अदालत ने यह भी नोट किया कि तेलंगाना अकेला राज्य नहीं है, जहां इन निर्देशों की अवहेलना हो रही है। कई अन्य राज्यों में भी DGP नियुक्ति में देरी कर कार्यवाहक DGP नियुक्त किए जा रहे हैं।

    इस पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आगे से UPSC राज्यों को समय पर प्रस्ताव भेजने के लिए लिख सकता है और अनुपालन न होने पर सीधे सुप्रीम कोर्ट में अवमानना कार्यवाही शुरू कर सकता है। अदालत ने दो टूक कहा कि देरी के मामलों में जिम्मेदारी तय की जाएगी।

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