12 साल से जेल में बंद UAPA आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, कहा- धीमी सुनवाई से अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हो रहा उल्लंघन

Praveen Mishra

29 July 2026 1:54 PM IST

  • 12 साल से जेल में बंद UAPA आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, कहा- धीमी सुनवाई से अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हो रहा उल्लंघन

    सुप्रीम कोर्ट ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार दो आरोपियों मोहम्मद साकिब अंसारी और वकार अज़हर को जमानत दे दी।

    अदालत ने कहा कि लगभग 12 वर्षों से जेल में बंद रहने और मुकदमे के जल्द समाप्त होने की कोई संभावना न होने के कारण उनकी निरंतर हिरासत संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है।

    जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल द्वारा दर्ज FIR संख्या 54/2011 से जुड़े मामले में दोनों आरोपियों को जमानत देने का आदेश दिया।

    अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट आवश्यक शर्तें तय करेगा और यदि दोनों किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं तो उन्हें रिहा किया जाए।

    दोनों आरोपियों ने दिल्ली हाईकोर्ट के 24 अप्रैल 2026 के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा UAPA की धारा 43D(5) के तहत उनकी जमानत याचिकाएं खारिज करने के आदेश को बरकरार रखा गया था।

    सुप्रीम कोर्ट ने ई-कोर्ट्स पोर्टल पर उपलब्ध रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि मुकदमे की प्रगति बेहद धीमी रही है। अभियोजन पक्ष ने 197 गवाहों की सूची दी है, लेकिन अब तक केवल 68 गवाहों की ही गवाही हो सकी है।

    जनवरी 2025 से अब तक केवल दो गवाहों का परीक्षण हुआ है, जिनमें से एक की गवाही भी अधूरी रही।

    अदालत ने कहा कि मामले में 25 आरोपी हैं और मौजूदा गति से ट्रायल के जल्द पूरा होने की कोई संभावना नहीं दिखती।

    खंडपीठ ने यह भी नोट किया कि दोनों आरोपी 2014 से हिरासत में हैं और दिल्ली मामले के अलावा राजस्थान के दो अन्य मामलों में या तो उन्हें जमानत मिल चुकी है या उनकी सजा निलंबित की जा चुकी है।

    इसके अलावा, दिल्ली मामले में एक सह-आरोपी मोहम्मद मारूफ को भी पहले ही जमानत मिल चुकी है।

    इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपियों की लंबी अवधि तक जारी हिरासत को उचित नहीं ठहराया जा सकता और यह अनुच्छेद 21 के तहत उनके व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है।

    इसलिए अदालत ने दोनों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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