सुप्रीम कोर्ट ने TVK विधायक श्रीनिवास सेतुपति को फ्लोर टेस्ट में वोटिंग की अनुमति दी
Praveen Mishra
13 May 2026 1:56 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें श्रीनिवास सेतुपति को तमिलनाडु विधानसभा के फ्लोर टेस्ट में मतदान करने से रोका गया था। इसके साथ ही कोर्ट ने डीएमके उम्मीदवार के.आर. पेरियाकरुप्पन द्वारा दायर याचिका पर मद्रास हाईकोर्ट में चल रही कार्यवाही पर भी रोक लगा दी।
जस्टिस विक्रम नाथ जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने टीवीके विधायक सेतुपति की याचिका पर सुनवाई की। सेतुपति ने मद्रास हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें आज होने वाले विश्वास मत में हिस्सा लेने से रोक दिया गया था।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने हाईकोर्ट के आदेश को “पूरी तरह गलत” बताते हुए कहा कि इस पर कड़ी टिप्पणी की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि शनिवार शाम को दाखिल हुई रिट याचिका पर रविवार को तत्काल सुनवाई कैसे की गई।
वहीं डीएमके उम्मीदवार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि यह मामला असाधारण परिस्थितियों वाला है, इसलिए हाईकोर्ट ने अपने विशेष अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल किया। उन्होंने बताया कि तिरुपथुर विधानसभा सीट पर पेरियाकरुप्पन के पक्ष में पड़ा एक पोस्टल बैलेट गलती से दूसरी समान नाम वाली सीट पर भेज दिया गया था। यदि उस वोट की गिनती होती, तो परिणाम बराबरी पर आ सकता था।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि चुनाव परिणाम को चुनौती देने के लिए अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका कैसे दायर की जा सकती है, जबकि इसके लिए चुनाव याचिका ही उचित कानूनी उपाय है। जस्टिस संदीप मेहता ने टिप्पणी करते हुए कहा, “यह बेहद गंभीर है। हाईकोर्ट खुद कहता है कि चुनाव याचिका उचित उपाय है, फिर भी रिट याचिका पर सुनवाई करता है।”
सुप्रीम कोर्ट ने डीएमके उम्मीदवार को जवाब दाखिल करने का मौका देते हुए मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी। सुनवाई के दौरान सिंहवी ने कहा कि फ्लोर टेस्ट की प्रक्रिया जारी है, जबकि रोहतगी ने बताया कि डीएमके फ्लोर टेस्ट का बहिष्कार कर रही है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब मद्रास हाईकोर्ट ने मंगलवार को अंतरिम आदेश पारित कर सेतुपति को विश्वास मत में वोट डालने से रोक दिया था। सेतुपति ने चुनाव में डीएमके नेता पेरियाकरुप्पन को केवल एक वोट से हराया था। डीएमके उम्मीदवार ने आरोप लगाया था कि उनके पक्ष में पड़ा एक पोस्टल बैलेट गलत निर्वाचन क्षेत्र में भेजे जाने के कारण गिना नहीं गया।
हाईकोर्ट ने कहा था कि जब तक चुनाव विवाद लंबित है, तब तक सेतुपति को वोट देने की अनुमति देने से सरकार की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर कोर्ट ने उनके मतदान पर रोक लगाई थी।

