सिर्फ कॉन्ट्रैक्ट तोड़ने से धोखाधड़ी का मामला नहीं बनता, शुरुआत से बेईमान मंशा जरूरी: सुप्रीम कोर्ट
Praveen Mishra
4 Aug 2026 1:29 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केवल किसी अनुबंध (Contract) का उल्लंघन होने से धोखाधड़ी (Cheating) का आपराधिक मामला नहीं बनता। इसके लिए यह साबित होना जरूरी है कि आरोपी की धोखाधड़ी या बेईमान मंशा लेन-देन की शुरुआत से ही थी।
इसी आधार पर कोर्ट ने दो भू-स्वामियों के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी और आपराधिक न्यासभंग (IPC की धारा 406 और 420) की कार्यवाही रद्द कर दी।
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ ने कहा कि मामला वर्ष 2012 के एक जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट (Joint Development Agreement) से जुड़ा था, जिसके तहत डेवलपर ने 3 करोड़ रुपये की रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट दी थी।
बाद में सीएमडीए (CMDA) ने परियोजना को मंजूरी नहीं दी क्योंकि जमीन अनधिकृत लेआउट का हिस्सा थी। इसके बाद भू-स्वामियों ने संपत्ति तीसरे पक्ष को बेच दी, जिसके बाद डेवलपर ने आपराधिक मामला दर्ज कराया।
कोर्ट ने Hridaya Ranjan Prasad Verma v. State of Bihar के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अनुबंध का उल्लंघन अपने आप में धोखाधड़ी नहीं है। रिकॉर्ड में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि भू-स्वामियों ने शुरुआत से ही डेवलपर को धोखा देने की मंशा रखी थी। परियोजना वैधानिक मंजूरी न मिलने के कारण विफल हुई।
खंडपीठ ने कहा कि यह विवाद पूरी तरह दीवानी (Civil) प्रकृति का है और इसे आपराधिक रंग नहीं दिया जा सकता। इसलिए मद्रास हाईकोर्ट का आदेश रद्द करते हुए एफआईआर, चार्जशीट और सभी आपराधिक कार्यवाहियों को निरस्त कर दिया।
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि पक्षकार अपने दीवानी उपाय अपनाने के लिए स्वतंत्र रहेंगे।


