2 लाख से अधिक डॉग बाइट मामले; सुप्रीम कोर्ट बोला- आवारा कुत्तों की समस्या अब बेहद चिंताजनक

Praveen Mishra

21 May 2026 10:54 AM IST

  • 2 लाख से अधिक डॉग बाइट मामले; सुप्रीम कोर्ट बोला- आवारा कुत्तों की समस्या अब बेहद चिंताजनक

    देशभर में बढ़ते कुत्तों के हमलों और डॉग बाइट की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आवारा कुत्तों की समस्या अब “अत्यंत चिंताजनक” स्तर तक पहुंच चुकी है और यह सीधे तौर पर सार्वजनिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गई है। अदालत ने कहा कि यह घटनाएं अब इक्का-दुक्का नहीं रहीं, बल्कि पूरे देश में लगातार और व्यापक रूप से सामने आ रही हैं, जिनमें गंभीर शारीरिक चोटें, मानसिक आघात और कई मामलों में लोगों की मौत तक हो रही है।

    जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की खंडपीठ ने 19 मई को पारित अपने फैसले में संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने संबंधी पूर्व निर्देशों को बरकरार रखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों की कार्यप्रणाली पर भी कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि वर्ष 2001 से “एनिमल बर्थ कंट्रोल” (Animal Birth Control - ABC) ढांचा लागू होने के बावजूद सरकारें आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचा विकसित करने में विफल रहीं।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारों की निष्क्रियता के कारण समस्या को रोकने के बजाय केवल संकट बढ़ने के बाद प्रतिक्रिया देने वाली व्यवस्था विकसित हुई है। अदालत ने इसे “प्रतिक्रियात्मक और संकट-आधारित दृष्टिकोण” बताते हुए कहा कि यह न तो प्रभावी है और न ही स्थायी समाधान दे सकता है।

    अदालत के समक्ष रखी गई रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए पीठ ने कहा कि राजस्थान के श्रीगंगानगर में तीन महीनों के भीतर 1,840 डॉग बाइट मामले सामने आए, जबकि सीकर में बच्चों पर आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाएं दर्ज हुईं। उदयपुर में वर्ष 2026 में अब तक लगभग 1,750 मामले दर्ज किए गए और भीलवाड़ा में एक ही दिन में 42 लोगों को आवारा कुत्तों ने काट लिया।

    तमिलनाडु की स्थिति को अदालत ने और अधिक गंभीर बताया। कोर्ट के अनुसार, केवल वर्ष 2026 के पहले चार महीनों में राज्य में लगभग 2.63 लाख डॉग बाइट मामले और 17 मौतें दर्ज हुईं। वहीं कर्नाटक में इसी अवधि में 2 लाख से अधिक मामले और कम से कम 25 रेबीज से संबंधित मौतें दर्ज की गईं। अदालत ने कहा कि यह आंकड़े इस समस्या को गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था का मुद्दा बनाते हैं।

    सुप्रीम कोर्ट ने नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का भी उल्लेख किया, जहां 1 जनवरी 2026 से अब तक कम से कम 31 डॉग बाइट घटनाएं सामने आने की बात कही गई। अदालत ने कहा कि देश के सबसे व्यस्त अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों में से एक पर लगातार ऐसी घटनाएं होना मौजूदा सुरक्षा व्यवस्थाओं की गंभीर विफलता को दर्शाता है।

    पीठ ने कहा कि आवारा कुत्तों की अनियंत्रित बढ़ती संख्या अब उन्हें “जंगली स्वभाव” (Feral) की ओर धकेल रही है और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ऐसे जानवरों की मौजूदगी मानव सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यद्यपि पशु कल्याण संवैधानिक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन मानव जीवन और सुरक्षा सर्वोपरि है।

    कोर्ट ने कहा, “जब मानव जीवन और संवेदनशील जीवों के कल्याण के बीच संतुलन का प्रश्न उठे, तो संवैधानिक संतुलन स्पष्ट रूप से मानव जीवन की सुरक्षा के पक्ष में झुकना चाहिए।”

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया तो सार्वजनिक स्थानों पर “सबसे योग्य की उत्तरजीविता” (Survival of the Fittest) जैसी डार्विन की अवधारणा लागू होती दिखाई देगी।

    अदालत ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की उस दलील को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि हाईवे से आवारा जानवरों को हटाना मुख्य रूप से राज्यों की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने कहा कि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना NHAI की भी जिम्मेदारी है और उसे सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

    Praveen Mishra

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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