BREAKING | स्टूडेंट की NSA हिरासत रद्द करने और नोएडा DM की आलोचना वाले हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
Shahadat
23 Sept 2026 7:43 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाई, जिसमें गौतम बुद्ध नगर जिले (नोएडा) की मजिस्ट्रेट मेधा रूपम को नोएडा में मज़दूरों के विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में छात्रा आकृति चौधरी को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत में रखने के लिए अपनी सैलरी से 5 लाख रुपये का मुआवज़ा देने का निर्देश दिया गया था।
कोर्ट ने उस फ़ैसले के अमल पर भी रोक लगाई, जिसमें छात्रा की हिरासत रद्द की गई थी।
जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने DM और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर दो अलग-अलग याचिकाओं पर चैंबर में अंतरिम रोक का आदेश पारित किया। सुनवाई के दौरान, बेंच ने ज़िला मजिस्ट्रेट की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और यूपी सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी की दलीलें संक्षेप में सुनीं। इसके बाद VC कार्यवाही का ऑडियो म्यूट कर दिया गया और मीडिया की पहुँच रोक दी गई (रिपोर्टर सुप्रीम कोर्ट में शारीरिक रूप से प्रवेश नहीं कर सकते)।
कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के पैरा 27 से 33 पर रोक लगाई। इन पैराग्राफ़ में बेंच ने कड़ी टिप्पणी करते हुए साफ़ चेतावनी दी थी कि अफ़सरशाही का लगातार 'तानाशाही' वाला रवैया उत्तर प्रदेश को "ऑर्वेलियन डिस्टोपिया" (एक दमनकारी समाज) में बदल सकता है, और 5 लाख रुपये का मुआवज़ा देने का आदेश दिया था।
कोर्ट ने कहा,
"दोनों पक्षों के सीनियर वकीलों को सुनने के बाद यह कोर्ट इस राय पर है कि जब तक मामले की मेरिट पर सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक विवादित फ़ैसले, विशेष रूप से पैरा नंबर 27 से 33, के अमल पर रोक रहेगी।"
हाईकोर्ट के फ़ैसले के पैरा 27-33 में DM के ख़िलाफ़ कड़ी टिप्पणियाँ और मुआवज़ा देने का निर्देश शामिल है।
जहां SG मेहता ने तर्क दिया कि अधिकारी के ख़िलाफ़ टिप्पणियाँ "बेवजह" थीं, वहीं रोहतगी ने भी इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को "पूरी तरह से अनावश्यक" बताया। उन्होंने कहा कि प्रतिवादी, आकृति चौधरी, हरियाणा के मानेसर में "समस्या पैदा कर रही थीं" और बाद में आंदोलन नोएडा में शिफ्ट हो गया, जिसके कारण अप्रैल में आगज़नी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचा।
रोहतगी ने तर्क दिया कि हिरासत का प्रस्ताव SHO द्वारा रखा गया और अंततः DM द्वारा मंज़ूर किया गया। उन्होंने कहा कि DM के आदेश को सलाहकार समिति ने मंज़ूरी दी थी। बाद में राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने भी 'नेशनल सिक्योरिटी एक्ट' (NSA) के तहत इसे मंज़ूरी दी; उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि DM इस पूरी प्रक्रिया में सिर्फ़ एक "कड़ी" थे।
रोहतगी ने आगे तर्क दिया कि हाईकोर्ट ने NSA के तहत हिरासत में लेने के आदेश की समीक्षा नहीं की, बल्कि कोर्ट ने सिर्फ़ यह देखा था कि गिरफ़्तारी कानूनी थी या नहीं। इस मोड़ पर कार्यवाही का ऑडियो रोक दिया गया, जिससे आगे की कार्यवाही की जानकारी नहीं मिल सकी।
सीनियर वकील कॉलिन गोंसाल्वेस ने कैविएट पर आकृति चौधरी का पक्ष रखा। बेंच ने प्रतिवादी को अपना जवाबी हलफ़नामा दाखिल करने की अनुमति दी।
बता दें, दिल्ली यूनिवर्सिटी की लॉ स्टूडेंट और एक्टिविस्ट, 24 साल की आकृति चौधरी को NSA के तहत हिरासत में लेने का आदेश रद्द करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा के ज़िला मजिस्ट्रेट द्वारा आदेश जारी करने के तरीके की कड़ी आलोचना की थी।
Case Details: MEDHA ROOPAM v AKRITI CHAUDHARY AND ORS|Diary No. 56202-2026 |

