विधानसभा विशेषाधिकार बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: सुप्रीम कोर्ट 6 अक्टूबर से करेगा सुनवाई

Praveen Mishra

12 Aug 2026 3:48 PM IST

  • विधानसभा विशेषाधिकार बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: सुप्रीम कोर्ट 6 अक्टूबर से करेगा सुनवाई

    सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की संविधान पीठ 6 अक्टूबर से इस महत्वपूर्ण संवैधानिक सवाल पर सुनवाई करेगी कि क्या राज्य विधानसभाओं के सदस्यों को संविधान के अनुच्छेद 194 के तहत मिले विशेषाधिकार, नागरिकों के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रभावी हो सकते हैं।

    चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने बुधवार को मामले की सुनवाई 6 अक्टूबर से शुरू करने का फैसला किया।

    मामला N. Ravi v. Speaker, Legislative Assembly Chennai से जुड़ा है। कोर्ट यह भी जांचेगा कि क्या विधानसभा विशेषाधिकार का इस्तेमाल नागरिकों, खासकर पत्रकारों, के खिलाफ तब किया जा सकता है जब उनके लेख या प्रकाशन को सदन के विशेषाधिकार का उल्लंघन माना जाए।

    2003 के 'द हिंदू' मामले से जुड़ा विवाद

    मामले की शुरुआत 2003 में तमिलनाडु विधानसभा और The Hindu अखबार के बीच विवाद से हुई। अप्रैल 2003 में अखबार ने “Rising Intolerance” शीर्षक से एक संपादकीय प्रकाशित किया था, जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री जे. जयललिता और उनकी सरकार की आलोचना की गई थी।

    विधानसभा ने आरोप लगाया कि अखबार ने सदन की कार्यवाही को गलत तरीके से प्रस्तुत किया और विशेषाधिकार का उल्लंघन किया। 7 नवंबर 2003 को तत्कालीन स्पीकर के. कालिमुथु ने प्रकाशन को विशेषाधिकार हनन माना और बाद में अखबार के संपादकीय कर्मचारियों की गिरफ्तारी का प्रस्ताव पारित किया गया।

    इसके बाद The Hindu के संपादक एन. रवि सहित पांच पत्रकारों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पत्रकारों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिसके बाद 10 नवंबर 2003 को दो जजों की पीठ ने गिरफ्तारियों पर रोक लगा दी।

    अनुच्छेद 19 और 194 के बीच टकराव का सवाल

    मामले में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों में भी अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं। Pandit M.S.M. Sharma v. Shri Krishna Sinha मामले में कोर्ट ने कहा था कि अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता विधानसभा के विशेषाधिकारों से पूरी तरह अप्रभावित नहीं है।

    वहीं, In Re: Under Article 143 में भी मौलिक अधिकारों और विधायी विशेषाधिकारों के संबंध पर विचार किया गया था।

    इन फैसलों के बीच मतभेद को देखते हुए मामला पहले पांच जजों की संविधान पीठ और बाद में सात जजों की संविधान पीठ को भेजा गया।

    अब करीब दो दशक से लंबित इस मामले पर सात जजों की पीठ 6 अक्टूबर से विस्तृत सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट का फैसला यह स्पष्ट कर सकता है कि विधानसभा के विशेषाधिकार और नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संवैधानिक संतुलन कैसे तय किया जाएगा।

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    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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