पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

  • पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

    सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह पटाखों पर पूरी तरह रोक नहीं लगाएगा और न ही उनके बेरोकटोक इस्तेमाल की इजाज़त देगा। कोर्ट ने धार्मिक भावनाओं और बच्चों, बुज़ुर्गों व बीमार लोगों पर वायु प्रदूषण के बुरे असर के बीच संतुलन बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

    जस्टिस एमएम सुंदरेश ने कहा,

    "हम यह बात साफ़ कर देना चाहते हैं। न तो हम पूरी तरह रोक लगाने की आपकी बात मानेंगे और न ही हम उन्हें 24 घंटे पटाखे फोड़ने की इजाज़त देंगे। इसके दो कारण हैं। पहला, पूरी तरह रोक लगाने से लोगों की भावनाओं पर असर पड़ सकता है। दूसरा, पूरे दिन पटाखे फोड़ने की इजाज़त देने से बुज़ुर्गों, बीमार लोगों और बच्चों समेत सभी जीवित प्राणियों पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। हमें कोई ऐसा समाधान निकालना होगा, जिसमें हम पटाखे फोड़ने का एक तय समय बता सकें और यह भी तय कर सकें कि किस तरह के पटाखे इस्तेमाल किए जा सकते हैं।"

    जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच अर्जुन गोपाल बनाम भारत सरकार मामले की सुनवाई कर रही थी। यह मामला तीन बच्चों ने दायर किया, जिसमें पटाखों से सेहत को होने वाले नुकसान और वायु प्रदूषण को कम करने के लिए पाबंदियां लगाने की मांग की गई।

    कोर्ट ने केंद्र सरकार के उस प्रस्ताव पर विचार किया, जिसमें कुछ शर्तों के साथ 'जॉइंट पटाखे' बनाने और आगे पर्यावरण संबंधी जांच के अधीन 'ग्रीन पटाखों' में बेरियम के इस्तेमाल की इजाज़त देने की बात कही गई।

    कोर्ट ने सरकार की उस सिफारिश को मान लिया, जिसमें नई पीढ़ी के 'जॉइंट पटाखों' को इजाज़त देने की बात थी, लेकिन इसके लिए पटाखों की संख्या, उनके शेल (गोले) के आकार और लगातार फटने वाले पटाखों के बीच समय के अंतर पर पाबंदियां लगाई गईं। ये सिफारिशें पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने स्टेकहोल्डर्स और तकनीकी विशेषज्ञों से बातचीत के बाद सौंपी थीं।

    हालांकि, कोर्ट ने इस साल दिवाली के लिए दिल्ली-NCR में पटाखों से जुड़े नियमों के अलग मुद्दे पर विचार टाल दिया, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में एमसी मेहता बनाम भारत सरकार मामले में इससे जुड़ी कार्यवाही पहले से ही चल रही है।

    Case Title : Arjun Gopal v. Union of India

    अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

    Next Story