सुप्रीम कोर्ट ने घोषित क्षमता साबित न कर पाने पर बिजली उत्पादक पर ₹162 करोड़ का जुर्माना बहाल किया
Shahadat
21 May 2026 5:23 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (20 मई) को फैसला सुनाया कि किसी बिजली उत्पादन केंद्र का अपनी घोषित बिजली उत्पादन क्षमता को साबित न कर पाना 'सख्त दायित्व' (Strict Liability) के दायरे में आता है। इसके लिए 'मेन्स रिया' (गलत इरादा) या जानबूझकर की गई गलती का सबूत होना ज़रूरी नहीं है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि चूंकि उत्पादन केंद्रों को उनकी घोषित क्षमता के आधार पर 'निश्चित शुल्क' (Fixed Charges) मिलते हैं, इसलिए तय समय सीमा के भीतर उस घोषित क्षमता को साबित न कर पाने पर अपने आप ही दंडात्मक कार्रवाई होगी।
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने पंजाब राज्य विद्युत नियामक आयोग (SERC) के उस आदेश को बहाल कर दिया, जिसमें तलवंडी साबो पावर लिमिटेड पर लगभग ₹162 करोड़ का जुर्माना लगाया गया। यह जुर्माना कंपनी द्वारा 'पंजाब स्टेट ग्रिड कोड, 2013' के तहत तय समय सीमा के भीतर अपनी घोषित बिजली उत्पादन क्षमता को साबित न कर पाने के कारण लगाया गया।
कोर्ट ने टिप्पणी की,
"DC (घोषित क्षमता) को साबित करना यह सुनिश्चित करने का एक तरीका है कि (राज्य के उत्पादन केंद्रों) में वास्तविक समय के आधार पर घोषित क्षमता के बराबर बिजली पैदा करने की क्षमता है, और यह घोषणा पूरी ईमानदारी से की गई। खासकर तब, जब घोषित क्षमता के आधार पर ही निश्चित शुल्क का भुगतान किया जाता है और घोषित क्षमता के 80% से अधिक वार्षिक उत्पादन करने पर प्रोत्साहन (Incentives) मिलते हैं।"
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद उन आरोपों के कारण खड़ा हुआ था कि तलवंडी साबो पावर लिमिटेड ने जनवरी 2017 के दौरान बार-बार अपनी वास्तविक आपूर्ति क्षमता से कहीं अधिक उत्पादन क्षमता घोषित की थी।
यह उत्पादन केंद्र 660 MW की तीन इकाइयों (Units) के साथ संचालित होता है और एक 'बिजली खरीद समझौते' (PPA) के तहत पंजाब को बिजली की आपूर्ति करता है। टैरिफ (शुल्क) संरचना के अनुसार, 'घोषित क्षमता' (DC) के आधार पर निश्चित शुल्क का भुगतान किया जाता है, भले ही बिजली खरीदने वाला (Procurer) वास्तव में कितनी भी बिजली की खपत करे।
बाद में पंजाब स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर ने कंपनी से यह "साबित" करने या प्रमाण देने के लिए कहा कि वह वास्तव में घोषित मात्रा में बिजली का उत्पादन कर सकती है। नियमों के अनुसार, कंपनी को यह प्रक्रिया चार "टाइम ब्लॉक" (प्रत्येक ब्लॉक 15 मिनट का होता है, यानी कुल मिलाकर लगभग एक घंटे) के भीतर पूरी करनी थी। राज्य के अधिकारियों के अनुसार, जनरेटिंग स्टेशन 15, 17, 24 और 31 जनवरी, 2017 को चार अलग-अलग मौकों पर प्रदर्शन नोटिस मिलने के बाद चौथे टाइम ब्लॉक के भीतर घोषित क्षमता हासिल करने में विफल रहा।
पंजाब राज्य विद्युत नियामक आयोग ने गलत घोषणा के निष्कर्षों को सही ठहराया और लगभग ₹162.74 करोड़ का जुर्माना लगाया। जनरेटिंग कंपनी के लंबित बिलों से लगभग ₹74 करोड़ काट लिए गए।
हालांकि, बिजली के लिए अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) ने बाद में SERC का आदेश रद्द किया, क्योंकि उसने कंपनी की इस दलील को मान लिया था कि इसमें कोई जानबूझकर की गई धोखाधड़ी या हेरफेर ("गेमिंग") शामिल नहीं था; जिसके चलते पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
निर्णय
APTEL का फैसला रद्द करते हुए जस्टिस चंद्रन द्वारा लिखे गए फैसले में कंपनी की इस दलील को खारिज कर दिया गया कि इसमें कोई 'गेमिंग' शामिल नहीं था। 'गेमिंग' और क्षमता प्रदर्शित करने में विफलता के बीच के अंतर को समझाते हुए न्यायालय ने कहा कि जहां कंपनी पूछे जाने पर वादा की गई बिजली का उत्पादन करने में बस विफल रहती है तो इसे अपनी सख्त जवाबदेही से बचने के लिए 'गेमिंग' के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता; क्योंकि 'गेमिंग' में कोई कंपनी अवैध लाभ कमाने के लिए जानबूझकर घोषणाओं में हेरफेर करती है, जिसके लिए विस्तृत जांच और उसके बाद प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन करना आवश्यक होता है।
न्यायालय ने कहा कि एक बार जब कंपनी आवश्यक चार टाइम ब्लॉकों के भीतर घोषित बिजली का उत्पादन नहीं कर पाई तो नियमों के तहत स्वचालित रूप से जुर्माना लग गया। न्यायालय ने आगे कहा कि यदि प्रतिवादी-कंपनी घोषणा के साथ तैयार नहीं थी, तो उसे अपनी क्षमताओं को दोबारा जाँचने के लिए समय मांगना चाहिए था, लेकिन वह ऐसा करने में विफल रही।
न्यायालय ने टिप्पणी की,
"राज्य लोड डिस्पैच सेंटर, जिसने SGS का उत्पादन कार्यक्रम और बिजली खरीदने वाले का निकासी कार्यक्रम (Drawal Schedule) अंतिम रूप दिया, इसलिए उसे घोषित क्षमता की सत्यता को सत्यापित करने के लिए प्रदर्शन की मांग करने का अधिकार है। SGS की विफलता कोयले के पर्याप्त स्टॉक की अनुपलब्धता, मशीनरी की मरम्मत, या किसी अन्य कारण से हो सकती है; जिसे SGS को SG कोड के अनुसार, स्टेशन-वार बिजली संयंत्र क्षमताओं की जानकारी देने से पहले ध्यान में रखना चाहिए था, या यदि वास्तविक समय के आधार पर क्षमता में कमी आती है, तो उसे संशोधन की मांग करनी चाहिए थी।"
परिणामस्वरूप, अपील स्वीकार की गई। साथ ही प्रतिवादी-जनरेटिंग स्टेशन पर जुर्माना लगाने वाले पंजाब SERC का आदेश बहाल कर दिया गया।
Cause Title: Punjab State Power Corporation Limited Versus Talwandi Sabo Power Limited & Ors.

