इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के लिए 'हैश वैल्यू' बताना ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट ने BSA की धारा 63(4) को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
Shahadat
28 May 2026 12:59 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (BSA) की धारा 63(4) की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी। कोर्ट ने पुणे बार एसोसिएशन द्वारा इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को स्वीकार करने के लिए बनाए गए सख्त नियमों के खिलाफ दायर चुनौती खारिज की। इस प्रावधान में दखल देने से इनकार करते हुए कोर्ट ने यह भी साफ किया कि मद्रास हाईकोर्ट का यह विचार कि ऐसे रिकॉर्ड को सिर्फ़ सरकार द्वारा नोटिफ़ाई किए गए इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के जांचकर्ता ही सर्टिफ़ाई कर सकते हैं, उसे एक बाध्यकारी मिसाल (binding precedent) के तौर पर नहीं माना जाना चाहिए।
चीफ़ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने 22 मई को संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर रिट याचिका पर यह आदेश दिया।
याचिकाकर्ता बार एसोसिएशन ने BSA की धारा 63(4) को चुनौती दी थी (जिसे अधिनियम के साथ जुड़ी अनुसूची के साथ पढ़ा जाना चाहिए)। याचिका में यह तर्क दिया गया कि यह प्रावधान उन मुकद्दमेबाज़ों पर अनुचित और अव्यावहारिक ज़िम्मेदारियाँ डालता है जो सबूत के तौर पर इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड पर निर्भर रहना चाहते हैं।
धारा 63(4) के तहत द्वितीयक सबूत (Secondary Evidence) के तौर पर जमा किए गए इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के साथ एक तय फ़ॉर्मेट में सर्टिफ़िकेट होना ज़रूरी है। अनुसूची के भाग A में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की 'हैश वैल्यू' सहित अन्य विवरणों की ज़रूरत होती है। भाग B में, किसी विशेषज्ञ द्वारा सर्टिफ़िकेशन की ज़रूरत होती है।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि ये शर्तें आम मुकद्दमेबाज़ों पर एक भारी बोझ डालती हैं, खासकर इसलिए क्योंकि इनका पालन करने के लिए ऐसी तकनीकी विशेषज्ञता की ज़रूरत हो सकती है, जो आसानी से उपलब्ध नहीं होती। याचिकाकर्ता के अनुसार, यह प्रावधान इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को स्वीकार करवाना बहुत ज़्यादा मुश्किल बना देता है। इसलिए इसमें साफ़ तौर पर मनमानी झलकती है।
डिजिटल सबूतों के लिए सख्त सुरक्षा उपायों की ज़रूरत पर कोर्ट का नज़रिया
इस चुनौती को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की मूल रूप से अलग प्रकृति और उनमें हेरफेर से जुड़े जोखिमों पर ज़ोर दिया।
बेंच ने टिप्पणी की कि आधुनिक जीवन के तेज़ी से डिजिटलीकरण के साथ ईमेल, ऑडियो-विज़ुअल फ़ाइलें और अन्य डिजिटल दस्तावेज़ जैसे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड मुकद्दमेबाज़ी में आम हो गए हैं। वे तेज़ी से पारंपरिक कागज़ी रिकॉर्ड की जगह ले रहे हैं।
कोर्ट ने कहा,
हालांकि, कागज़ी दस्तावेज़ों के विपरीत इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में लगातार बदलाव या हेरफेर की गुंजाइश रहती है, जिसका सीधा असर उनकी प्रामाणिकता, अखंडता और सबूत के तौर पर उनकी अहमियत पर पड़ता है।
कोर्ट ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफ़ेक टूल्स जैसे उभरते तकनीकी खतरों पर भी ध्यान दिया और टिप्पणी की कि इन विकासों ने डिजिटल सबूतों की विश्वसनीयता को लेकर चिंताओं को काफ़ी बढ़ा दिया। इस संदर्भ में, बेंच ने यह बात नोट की कि संसद ने सोच-समझकर BSA के तहत सबूतों का एक ज़्यादा मज़बूत ढांचा पेश किया, जिसने भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 के तहत पहले के सेक्शन 65B के नियम की जगह ली।
BSA के उद्देश्यों और कारणों के विवरण का ज़िक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि इस नए कानून का मकसद सबूतों के मानकों को आधुनिक बनाना है। इसके लिए इसने इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रिकॉर्ड को साफ़ तौर पर मान्यता दी है और सेकेंडरी सबूतों की स्वीकार्यता को पक्का करने के लिए "मैचिंग हैश वैल्यू" की ज़रूरत बताई।
इसके पीछे का तर्क समझाते हुए कोर्ट ने कहा कि हैश वैल्यू एक डिजिटल फिंगरप्रिंट की तरह काम करती है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक डेटा की पहचान और उसका वेरिफिकेशन करना मुमकिन हो पाता है।
कोर्ट ने कहा,
"किसी इलेक्ट्रॉनिक डेटा की हैश वैल्यू, एक इलेक्ट्रॉनिक फिंगरप्रिंट के ही बराबर होती है। यह डिजिटल डेटा की पहचान करने और उसे वेरिफाई करने का एक पक्का तरीका है।"
बेंच ने यह फ़ैसला दिया कि हैश वैल्यू बताने की शर्त, इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की प्रामाणिकता और अखंडता को पक्का करने के जायज़ मकसद को सीधे तौर पर पूरा करती है। इसलिए इसका इस कानून के मकसद के साथ एक साफ़ और तर्कसंगत जुड़ाव है।
इसी तरह पार्ट B में विशेषज्ञ के सर्टिफिकेशन की शर्त को सेकेंडरी इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को प्रामाणिकता की एक और परत देने वाला माना गया।
कोर्ट ने कहा,
"इन्हीं कारणों से हम इस सोची-समझी राय पर पहुंचे हैं कि इस नए प्रावधान का कानून के मकसद के साथ एक साफ़ और तर्कसंगत जुड़ाव है। इसलिए इसे न तो मनमाना कहा जा सकता है और न ही अतार्किक; ऐसा नहीं है कि इसमें साफ़ तौर पर मनमानी की कोई कमी हो।"
Case : Pune Bar Association v Union of India

