मामूली गवाही विरोधाभास से पंजीकृत बिक्री विलेख की वैधता पर संदेह नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

Praveen Mishra

25 Jun 2026 1:12 AM IST

  • मामूली गवाही विरोधाभास से पंजीकृत बिक्री विलेख की वैधता पर संदेह नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पंजीकृत बिक्री विलेख (Sale Deed) को कानूनन वैधता और प्रामाणिकता का मजबूत अनुमान प्राप्त होता है। ऐसे में सत्यापनकर्ता (Attesting Witness) के बयान में मामूली विरोधाभास मात्र से विलेख के निष्पादन पर संदेह नहीं किया जा सकता।

    जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की खंडपीठ ने हरिद्वार की कृषि भूमि से जुड़े एक विवाद में यह टिप्पणी की। समेकन अधिकारियों और हाईकोर्ट ने अपीलकर्ताओं के स्वामित्व दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि बिक्री विलेख के एक गवाह के विवरण में विसंगति है।

    हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिक्री विलेख की वैधता सत्यापन पर निर्भर नहीं करती। वसीयत या उपहार विलेख के विपरीत, बिक्री विलेख के लिए सत्यापन वैधानिक आवश्यकता नहीं है। इसलिए गवाह के विवरण में मामूली अंतर के आधार पर पंजीकृत दस्तावेज को संदिग्ध नहीं माना जा सकता।

    पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि 1957 में निष्पादित बिक्री विलेख पर बाद के संशोधनों को लागू नहीं किया जा सकता। साथ ही, जब तक किसी सक्षम सिविल अदालत द्वारा दस्तावेज निरस्त न किया जाए, समेकन अधिकारी केवल इस आधार पर उसे नजरअंदाज नहीं कर सकते कि वह कथित रूप से अवैध है।

    मामले में जालसाजी, धोखाधड़ी या दबाव का कोई आरोप नहीं था। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों के आदेश रद्द करते हुए अपील स्वीकार कर ली और अपीलकर्ताओं के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने का निर्देश दिया।

    Praveen Mishra

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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