पत्रकार नीलांजना बोउमिक के खिलाफ मानहानि केस: सुप्रीम कोर्ट ने रवि नायर की याचिका खारिज की
Praveen Mishra
11 Aug 2026 4:29 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने एक्टिविस्ट रवि नायर की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने पत्रकार नीलांजना बोउमिक के खिलाफ आपराधिक मानहानि की कार्यवाही रद्द करने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।
मामला Time पत्रिका में प्रकाशित एक लेख से जुड़ा था, जिसमें भारत के गैर-लाभकारी संगठनों के कामकाज और कथित अनियमितताओं पर चर्चा की गई थी। नायर का आरोप था कि लेख में उनके और उनके संगठन South Asia Human Rights Documentation Centre (SAHRDC) को मनी लॉन्ड्रिंग से जोड़कर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया गया।
नायर ने 2014 में आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज की थी। 2018 में ट्रायल कोर्ट ने पत्रकार को समन जारी किया। इसके बाद बोउमिक ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया।
जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की दिल्ली हाईकोर्ट पीठ ने शिकायत और समन आदेश को रद्द करते हुए कहा था कि तथ्यात्मक रूप से सही रिपोर्टिंग को मानहानिकारक नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि लेख में नायर को उनके NGO के खिलाफ हुई जांच में आरोपी या दोषी नहीं बताया गया था।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि केवल लेख में कथित संकेत या इशारे (innuendo) होने का दावा करना मानहानि का मामला बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है। साथ ही, 2010 में प्रकाशित लेख को लेकर 2014 में दाखिल की गई शिकायत को limitation से barred भी माना गया था।
अब सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के इस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है।


