सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को स्कूलों में राजस्थानी भाषा पढ़ाने की नीति बनाने का दिया निर्देश

Praveen Mishra

12 May 2026 1:07 PM IST

  • सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को स्कूलों में राजस्थानी भाषा पढ़ाने की नीति बनाने का दिया निर्देश

    सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राजस्थान सरकार को निर्देश दिया कि वह राज्य के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में राजस्थानी भाषा को एक विषय के रूप में शुरू करने और पढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाए। अदालत ने कहा कि मातृभाषा आधारित शिक्षा को लेकर उपयुक्त नीति ढांचे की कमी दिखाई दे रही है।

    जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप एक व्यापक और प्रभावी नीति तैयार करनी चाहिए, ताकि मातृभाषा आधारित शिक्षा को लागू किया जा सके।

    कोर्ट ने निर्देश दिया कि राजस्थान सरकार राजस्थानी भाषा को स्थानीय/क्षेत्रीय भाषा के रूप में उचित मान्यता दे और इसे चरणबद्ध तरीके से स्कूलों में पढ़ाने तथा शुरुआती स्तर पर शिक्षण माध्यम के रूप में अपनाने की दिशा में काम करे।

    खंडपीठ ने कहा कि राजस्थानी भाषा पहले से ही राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जा रही है, इसलिए यह कहना गलत होगा कि भाषा को शैक्षणिक या संस्थागत मान्यता प्राप्त नहीं है। अदालत ने राज्य सरकार के इस रुख की आलोचना की कि केवल संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं को ही सरकारी स्कूलों में अतिरिक्त भाषा के रूप में पढ़ाया जा सकता है।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार का यह रवैया अत्यधिक तकनीकी और संकीर्ण सोच को दर्शाता है, जबकि उच्च शिक्षा स्तर पर स्वयं राज्य में राजस्थानी पढ़ाई जा रही है।

    अदालत ने राज्य सरकार को समयबद्ध और सकारात्मक कदम उठाने का निर्देश देते हुए कहा कि सभी सरकारी और निजी स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से राजस्थानी भाषा को विषय के रूप में शुरू किया जाए।

    कोर्ट ने कहा कि यह मामला “महत्वपूर्ण संवैधानिक महत्व” का है और वर्तमान में नीति के अभाव के कारण एक स्पष्ट शून्यता दिखाई दे रही है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नीति बनाना सरकार का क्षेत्र है, लेकिन यदि संवैधानिक अधिकारों के क्रियान्वयन में उदासीनता दिखाई जाए तो अदालत मूकदर्शक नहीं बनी रह सकती।

    खंडपीठ ने कहा कि संविधान और कानूनों में जिन अधिकारों को मान्यता दी गई है, उन्हें केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। यदि केंद्र सरकार स्वयं कानूनों और नीतियों के जरिए बच्चों को उनकी समझ की भाषा में शिक्षा देने की आवश्यकता स्वीकार कर चुकी है, तो राज्यों पर भी इसे लागू करने की जिम्मेदारी बनती है।

    मामले की अगली सुनवाई सितंबर में अनुपालन रिपोर्ट के लिए सूचीबद्ध की गई है।

    यह फैसला उस याचिका पर आया जिसमें स्कूलों में बच्चों को राजस्थानी भाषा में शिक्षा देने और राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा (REET) के पाठ्यक्रम में राजस्थानी भाषा को शामिल करने की मांग की गई थी।

    याचिकाकर्ताओं ने बताया कि 2011 की जनगणना के अनुसार करीब 4.36 करोड़ लोग राजस्थानी भाषा बोलते हैं, जबकि राजस्थान की आधिकारिक भाषा 1956 के राजस्थान राजभाषा अधिनियम के तहत हिंदी है।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

    Next Story