Delhi Rent Act| बैंक के विलय से किरायेदारी अधिकार भी हस्तांतरित होते हैं, मकान मालिक की लिखित सहमति न हो तो बेदखली होगी: सुप्रीम कोर्ट

  • Delhi Rent Act| बैंक के विलय से किरायेदारी अधिकार भी हस्तांतरित होते हैं, मकान मालिक की लिखित सहमति न हो तो बेदखली होगी: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि किरायेदार बैंक का किसी अन्य बैंक में विलय (Amalgamation) हो जाता है, तो यह किरायेदारी अधिकारों का हस्तांतरण (Transfer of Tenancy) माना जाएगा। यदि ऐसा हस्तांतरण मकान मालिक की लिखित सहमति के बिना होता है, तो दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम (Delhi Rent Control Act) की धारा 14(1)(b) के तहत बेदखली का आधार बनता है।

    जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की खंडपीठ ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के खिलाफ बेदखली का आदेश बहाल करते हुए कहा कि मूल किरायेदार हिंदुस्तान कमर्शियल बैंक (HCB) के पीएनबी में विलय के बाद किरायेदारी अधिकार और परिसर का कब्जा पीएनबी को स्थानांतरित हो गया। चूंकि यह हस्तांतरण मकान मालिक की लिखित सहमति के बिना हुआ, इसलिए पीएनबी बेदखली के लिए उत्तरदायी है।

    मामला नई दिल्ली के कनॉट सर्कस स्थित प्रताप बिल्डिंग के एक व्यावसायिक परिसर से जुड़ा था, जिसे वर्ष 1947 में हिंदुस्तान कमर्शियल बैंक को किराये पर दिया गया था। वर्ष 1986 में हिंदुस्तान कमर्शियल बैंक का पंजाब नेशनल बैंक में विलय हो गया, जिसके बाद पीएनबी उसी परिसर का उपयोग करता रहा।

    मकान मालिक ने दलील दी कि बैंक के विलय के बाद परिसर का कब्जा और किरायेदारी अधिकार पीएनबी को बिना उसकी लिखित सहमति के हस्तांतरित हो गए, जो दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम की धारा 14(1)(b) का उल्लंघन है।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मायने नहीं रखता कि हस्तांतरण स्वैच्छिक था या वैधानिक प्रक्रिया के तहत हुआ। यदि किरायेदारी अधिकार और कब्जा किसी अन्य इकाई को मकान मालिक की लिखित सहमति के बिना स्थानांतरित हो जाते हैं, तो बेदखली का प्रावधान स्वतः लागू हो जाता है।

    इसी आधार पर अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला रद्द करते हुए पीएनबी को 31 जनवरी 2027 तक परिसर खाली करने का निर्देश दिया।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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