RTE Act के तहत EWS बच्चों के लिए 25% आरक्षण लागू न होने के आरोप पर सुप्रीम कोर्ट का पंजाब सरकार को नोटिस

Praveen Mishra

15 Jun 2026 11:08 PM IST

  • RTE Act के तहत EWS बच्चों के लिए 25% आरक्षण लागू न होने के आरोप पर सुप्रीम कोर्ट का पंजाब सरकार को नोटिस

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पंजाब सरकार ने बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) के महत्वपूर्ण प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया है। विशेष रूप से याचिका में कहा गया है कि अधिनियम की धारा 12(1)(c) के तहत निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित समूहों के बच्चों के लिए प्रवेश स्तर पर 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने की व्यवस्था का पालन नहीं किया जा रहा है।

    चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहन की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता, जो स्वयं मामले में पेश हुए, से कहा कि वे यह दिखाने के लिए ठोस सामग्री रिकॉर्ड पर रखें कि कानून का पालन वास्तव में नहीं हो रहा है।

    सुनवाई के दौरान चीफ़ जस्टिस ने सुझाव दिया कि याचिकाकर्ता सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की संख्या, उनकी संबद्धता, स्वीकृत सीटों, कुल प्रवेशों और EWS व वंचित वर्ग के छात्रों के दाखिलों से संबंधित जानकारी प्राप्त करें। पीठ ने कहा कि इससे अदालत को वास्तविक स्थिति समझने में मदद मिलेगी।

    याचिकाकर्ता ने दावा किया कि यह समस्या किसी एक स्कूल तक सीमित नहीं है और पिछले 15 वर्षों से पूरे पंजाब में अधिनियम का समुचित क्रियान्वयन नहीं हुआ है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने राज्य सरकार के उस हलफनामे का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि EWS और वंचित वर्ग के 476 बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिया गया है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता को यह दिखाना होगा कि कौन-से स्कूल कानून का पालन नहीं कर रहे हैं।

    याचिकाकर्ता ने दलील दी कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार निजी स्कूलों में हर वर्ष लगभग दो लाख बच्चों का प्रवेश होता है, इसलिए 25 प्रतिशत आरक्षण के तहत कम से कम 50,000 बच्चों को दाखिला मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे को लेकर लगातार मुकदमेबाजी होती रही है।

    सुनवाई के दौरान चीफ़ जस्टिस ने यह भी पूछा कि EWS श्रेणी के छात्रों के प्रवेश के लिए निजी स्कूलों को भुगतान किस प्रकार किया जाता है और क्या सरकार उन्हें प्रतिपूर्ति करती है। इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि अधिनियम में ही सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क की प्रतिपूर्ति का प्रावधान है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2009 में भारत सरकार में संयुक्त सचिव के रूप में कार्य करते हुए वे इस कानून के प्रारूपण से जुड़े रहे थे और उनका निजी स्कूलों से कोई संबंध नहीं है।

    पीठ ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वे किसी अपेक्षाकृत पिछड़े जिले का चयन कर जिला-स्तरीय अध्ययन करें और अधिनियम के क्रियान्वयन से संबंधित ठोस आंकड़े अदालत के समक्ष रखें। याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने विभिन्न जिलों में RTI आवेदन दायर किए हैं और प्राप्त उत्तरों से संकेत मिलता है कि पिछले 15 वर्षों में इस योजना के तहत कोई प्रवेश नहीं हुआ।

    याचिका में केंद्र सरकार को संविधान के अनुच्छेद 256 और 355 के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग कर पंजाब में RTE Act की धारा 12(1)(c), 12(2) और 18 के अनुपालन को सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की गई है। साथ ही, अधिनियम के पालन की निगरानी के लिए पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था, सार्वजनिक डैशबोर्ड, सीटों और प्रवेश कार्यक्रम का प्रकाशन, सरल आवेदन प्रक्रिया, प्रतिपूर्ति तंत्र तथा उल्लंघन की स्थिति में प्रवर्तन उपायों की भी मांग की गई है।

    मामले की अगली सुनवाई पर अदालत याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले आंकड़ों और सामग्री पर विचार करेगी।

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