टेंडर के अंतिम चरण में न्यायिक हस्तक्षेप से बचना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
Praveen Mishra
19 Aug 2026 12:28 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी टेंडर प्रक्रिया में देरी से की गई चुनौती को खारिज करते हुए कहा कि जब टेंडर प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी हो और सफल बोलीदाताओं के अधिकार स्थापित हो गए हों, तब न्यायिक हस्तक्षेप से बचना चाहिए।
जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस अरुण पल्लि की खंडपीठ ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों के लिए स्पोर्ट्स गुड्स और आउटडोर जिम उपकरणों की खरीद से जुड़े मामले में यह फैसला सुनाया।
मामले में टेंडर 22 दिसंबर 2025 को जारी हुआ था, जबकि बोली की अंतिम तारीख 13 जनवरी 2026 थी। याचिकाकर्ताओं ने करीब चार महीने बाद 1 अप्रैल 2026 को टेंडर की शर्तों को हाईकोर्ट में चुनौती दी। तब तक एक टेंडर का ठेका दिया जा चुका था और बाकी टेंडर दस्तावेज सत्यापन, फिजिकल डेमोंस्ट्रेशन और वित्तीय मूल्यांकन के चरण में पहुंच चुके थे।
कोर्ट ने कहा कि जो बोलीदाता सभी पात्रता शर्तें पूरी कर चुके हैं और अंतिम वित्तीय मूल्यांकन के करीब हैं, उनके अधिकारों को इस स्तर पर बाधित करना अनुचित और अन्यायपूर्ण होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि टेंडर की किसी शर्त से आपत्ति है तो उसे शुरुआत में ही चुनौती दी जानी चाहिए, न कि प्रक्रिया के अंतिम चरण में।
याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली में तीन वर्षों से कार्यालय और वेयरहाउस होने की अनिवार्य शर्त को मनमाना बताया था। हालांकि, कोर्ट ने माना कि तत्काल आपूर्ति, इंस्टॉलेशन, रखरखाव और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए यह शर्त संचालन संबंधी जरूरतों पर आधारित थी।
कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि करीब ₹34 करोड़ की खरीद लगभग 16 लाख स्कूली छात्रों के लिए थी और मुकदमेबाजी के कारण इसका एक बड़ा हिस्सा प्रभावित हो रहा था।
सुप्रीम कोर्ट ने अपीलें खारिज करते हुए कहा कि अंतिम चरण में पहुंची टेंडर प्रक्रिया को केवल देरी से की गई चुनौती के आधार पर बाधित नहीं किया जा सकता।


