सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2013 के नियमों में संशोधन का प्रस्ताव रखा, सुझाव मांगे

  • सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2013 के नियमों में संशोधन का प्रस्ताव रखा, सुझाव मांगे

    सुप्रीम कोर्ट नियम (Supreme Court Rule), 2013 में संशोधन करने का प्रस्ताव करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने न्याय परिदान प्रणाली में पणधारियों से सुझाव/विचार आमंत्रित करते हुए एक परिपत्र जारी किया है।

    सर्कुलर, जिसे आज सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया गया था, में कहा गया है,

    खंडपीठ ने कहा, ''सुप्रीम कोर्ट नियम संशोधन समिति सुप्रीम कोर्ट नियम, 2013 में कुछ संशोधनों पर विचार करने की प्रक्रिया में है। इस कवायद को व्यापक बनाने और मौजूदा अभ्यास और प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए, न्याय वितरण प्रणाली में सभी हितधारकों से अनुरोध है कि वे इस संबंध में अपने सुझाव/विचार प्रस्तुत करें, अर्थात, या तो उक्त नियमों और/या हैंडबुक ऑन प्रैक्टिस एंड प्रोसीजर एंड ऑफिस प्रोसीजर, 2017 पर असर डालें।

    सुप्रीम कोर्ट नियम संशोधन समिति को सुझाव केवल आधिकारिक ई-मेल reg.admnmaterial@sci.nic.in पर 1 मई, 2025 को या उससे पहले ई-मेल द्वारा भेजे जा सकते हैं। उसकी कोई हार्ड कॉपी पर विचार नहीं किया जाएगा।

    यह उल्लेख करना उचित है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ऑर्डर शीट में एडवोकेट्स की उपस्थिति दर्ज करने के संबंध में एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया, जिसमें कहा गया कि यह सुप्रीम कोर्ट के नियम, 2013 के अनुसार सख्ती से होना चाहिए।

    जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस एससी शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि केवल सीनियर एडवोकेट/एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड/एडवोकेट, जो मामले की सुनवाई के समय शारीरिक रूप से उपस्थित हैं और अदालत में बहस कर रहे हैं और ऐसे बहस करने वाले सीनियर एडवोकेट/एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड/एडवोकेट को अदालत में सहायता के लिए एक-एक एडवोकेट/एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड, जैसा भी मामला हो, की पेशी होगी। कार्यवाही के रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा। यह नोट किया गया कि एससी नियमों द्वारा निर्धारित फॉर्म 30 के अनुसार उपस्थिति पर्ची केवल इन दिखावे की रिकॉर्डिंग की अनुमति देती है।

    इस फैसले के बाद जस्टिस बीआर गवई ने निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली को बरी करने के खिलाफ अपील अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होने की तारीख पर बिना तैयारी के पेश होने पर सीबीआई के प्रति गंभीर नाराजगी व्यक्त करते हुए टिप्पणी की कि यदि पेशी केवल नाम के लिए की जाती है, तो उनकी अगुवाई वाली पीठ को न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा अपनाई गई प्रथा को अपनाने पर विचार करना पड़ सकता है।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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