वसीयत में दी गई संपत्ति पर टेस्टेटर का मालिकाना हक चुनौती देने पर प्रोबेट रद्द हो सकता है या नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने अमिकस क्यूरी नियुक्त किया
Praveen Mishra
20 Aug 2026 3:13 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने इस महत्वपूर्ण सवाल पर सहायता के लिए राजस्थान के अतिरिक्त महाधिवक्ता पद्मेश मिश्रा को amicus curiae नियुक्त किया है कि क्या वसीयत के तहत दी गई संपत्तियों पर टेस्टेटर के स्वामित्व को चुनौती देकर probate रद्द कराने की मांग की जा सकती है।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसकी वापसी की तारीख 21 सितंबर 2026 तय की गई है।
विवाद एक वसीयत से जुड़ा है, जिसके तहत टेस्टेटर ने कुछ संपत्तियां वसीयत की थीं। इस वसीयत का probate 13 दिसंबर 2011 को प्रदान किया गया था। इसके बाद प्रतिवादियों ने Indian Succession Act, 1925 की Section 383 के तहत probate रद्द करने की मांग की। उनका तर्क था कि टेस्टेटर स्वयं उन संपत्तियों की मालिक नहीं थीं, जिन्हें वसीयत के जरिए दिया गया था।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना था कि यह मूल रूप से टेस्टेटर के title को चुनौती देने का मामला है और ऐसा सवाल Probate Court में तय नहीं किया जा सकता। Probate Court का क्षेत्राधिकार मुख्यतः वसीयत की genuineness और उसके due execution की जांच तक सीमित है।
हाईकोर्ट ने Krishna Kumar Birla v. Rajendra Singh Lodha और G. Gopal v. C. Bhaskar जैसे सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि probate proceedings में caveatable interest रखने वाले व्यक्ति को ही उचित आधार पर आपत्ति का अधिकार हो सकता है।
हाईकोर्ट के अनुसार, मौजूदा मामले में प्रतिवादी टेस्टेटर के जरिए संपत्तियों में विरासत का कोई अधिकार नहीं मांग रहे थे, बल्कि उनका दावा था कि टेस्टेटर का स्वयं उन संपत्तियों पर title नहीं था। इसलिए उनके पास probate proceedings में आवश्यक caveatable interest नहीं था।
हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि संपत्ति के title का विवाद पहले से ही एक substantive civil suit में उठाया गया था, जहां इस मुद्दे का प्रभावी ढंग से निर्णय किया जा सकता है। इसी आधार पर probate रद्द करने की अर्जी खारिज कर दी गई थी।
अब सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि क्या वसीयत में शामिल संपत्तियों पर टेस्टेटर के title को चुनौती देना probate revocation का आधार बन सकता है, और इस महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न में अमिकस क्यूरी की सहायता ली जाएगी।


