वैवाहिक विवादों में झूठे POCSO मामलों का बढ़ता चलन चिंताजनक: सुप्रीम कोर्ट
Praveen Mishra
30 May 2026 11:46 AM IST

सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों के दौरान पति और उसके परिवार के खिलाफ झूठे POCSO मामलों के बढ़ते चलन पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। अदालत ने कहा कि कई मामलों में नाबालिग बच्चों, विशेषकर बेटियों, का इस्तेमाल प्रतिशोध लेने, अधिक आर्थिक समझौता हासिल करने या दूसरे पक्ष पर दबाव बनाने के लिए किया जाता है।
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए एक पति और उसके परिवार के खिलाफ दर्ज POCSO तथा दुष्कर्म समेत 10 से अधिक आपराधिक मामलों को रद्द कर दिया। अदालत ने पाया कि आरोप अस्पष्ट, मनगढ़ंत और साक्ष्यों से रहित थे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपराधिक कानून का दुरुपयोग केवल वैवाहिक विवादों तक सीमित नहीं है, बल्कि पारिवारिक, व्यावसायिक और वित्तीय विवादों में भी POCSO कानून का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। अदालत ने चेतावनी दी कि ऐसे झूठे मुकदमे निर्दोष लोगों को परेशान करने के साथ-साथ न्यायिक व्यवस्था पर भी अनावश्यक बोझ डालते हैं।
पीठ ने वकीलों और अदालतों से भी ऐसे मामलों की शुरुआती स्तर पर सावधानीपूर्वक जांच करने और निराधार आरोपों पर आपराधिक मुकदमे चलाने से बचने का आह्वान किया। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि वास्तविक यौन शोषण और वैवाहिक उत्पीड़न के मामलों में कानून का सख्ती से पालन होना चाहिए।

