PMO की राष्ट्रीय सलाहकार बताकर करोड़ों की ठगी के आरोप: सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को जारी किया नोटिस

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    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कश्मीरा संदीप पवार की जमानत याचिका पर महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया। कश्मीरा पर खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की “राष्ट्रीय सलाहकार” बताकर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने का आरोप है।

    जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद राज्य सरकार से जवाब मांगा।

    सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट सुधांशु एस चौधरी ने दलील दी कि FIR दो साल की देरी से दर्ज की गई और राज्य के पास यह साबित करने के लिए कोई ठोस बरामदगी नहीं है कि उनकी मुवक्किल ने ₹14 करोड़ की ठगी की।

    वकील ने यह भी कहा कि एक ही आरोपों पर दो समान FIR दर्ज की गई हैं, जो कानूनन “double jeopardy” का मामला बनता है। इस पर जस्टिस शर्मा ने टिप्पणी की कि यह “अजीब मामला” है, जैसा उन्होंने पहले कभी नहीं सुना।

    मामले के अनुसार, कश्मीरा पवार और गणेश गायकवाड़ पर आरोप है कि उन्होंने 'Make in India' और 'Smart Village' परियोजनाओं से जुड़ी उपलब्धियों का इस्तेमाल कर खुद को PMO का राष्ट्रीय सलाहकार बताकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए।

    आरोप है कि उन्होंने PMO के लेटरहेड तक नकली बनाए और दावा किया कि वे सरकारी टेंडर दिला सकते हैं।

    इन्हीं कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोगों से निवेश करवाया गया। शिकायतकर्ताओं के अनुसार करीब ₹14.49 करोड़ का निवेश कराया गया था। बाद में मीडिया रिपोर्ट्स और गिरफ्तारी के बाद शिकायत दर्ज हुई।

    इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि जांच के दौरान आरोपियों के घर से जब्त राउटर के जरिए फर्जी दस्तावेज भेजे जाने के सबूत मिले हैं।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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