शॉर्ट अटेंडेंस पर PhD लॉ छात्रों को नहीं मिलेगी LLB छात्रों वाली राहत: सुप्रीम कोर्ट
Praveen Mishra
21 Sept 2026 2:53 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें PhD लॉ छात्रों को कम उपस्थिति (Short Attendance) के कारण परीक्षा से वंचित न करने की वही अंतरिम राहत देने की मांग की गई थी, जो पहले BA LLB और LLB छात्रों को दी गई थी।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एजी मसीह की खंडपीठ याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
पीठ ने स्पष्ट किया कि पहले दिया गया राहत आदेश केवल BA LLB और LLB पाठ्यक्रमों के छात्रों तक सीमित था। इसे PhD छात्रों तक विस्तारित नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा, “आप दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश का लाभ नहीं ले सकते, जिसमें केवल BA LLB या LLB छात्रों को कम उपस्थिति के कारण परीक्षा से वंचित नहीं करने की छूट दी गई थी। यह PhD छात्रों पर लागू नहीं होती।”
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि पहले दी गई राहत के पीछे जो सिद्धांत था, वही PhD शोधार्थियों पर भी लागू होना चाहिए।
हालांकि, जस्टिस विक्रम नाथ ने टिप्पणी की, “आप परिपक्व लोग हैं, आपको क्यों...” इसके बाद पीठ ने याचिका खारिज कर दी।
क्या था LLB छात्रों का मामला?
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले BCI द्वारा निर्धारित उपस्थिति मानदंडों से जुड़े विवाद में एक बार की अंतरिम राहत देते हुए कहा था कि संबंधित BA LLB और LLB छात्रों को मौजूदा अकादमिक सत्र में केवल कम उपस्थिति के आधार पर परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाए।
यह राहत दिल्ली हाईकोर्ट के उस मामले से जुड़ी थी, जिसमें लॉ छात्रों के लिए Bar Council of India (BCI) द्वारा निर्धारित न्यूनतम उपस्थिति की शर्तों को चुनौती दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यह राहत किसी भी पाठ्यक्रम के लिए उपस्थिति की सामान्य छूट नहीं थी, बल्कि संबंधित लॉ छात्रों के मामले तक सीमित थी।
इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने अब PhD लॉ छात्रों को समान राहत देने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।

