सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया, कहा — ऊंची बोली खारिज करना अनुचित

Praveen Mishra

8 Nov 2025 6:44 PM IST

  • सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया, कहा — ऊंची बोली खारिज करना अनुचित

    सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें राज्य सरकार द्वारा महानदी सैंड क्वारी की पांच साल की रेत खनन लीज़ को कम बोली लगाने वाले को देने के फैसले को सही ठहराया गया था। अदालत ने कहा कि सबसे ऊंची बोली लगाने वाले की अयोग्यता टेंडर की शर्तों की गलत व्याख्या पर आधारित थी, जिससे राज्य को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने कहा कि सरकारी निविदा कोई निजी सौदा नहीं होती, बल्कि यह शासन का एक साधन है जिसके माध्यम से राज्य जनता की संपत्ति का ट्रस्टी होने के अपने कर्तव्य का पालन करता है।

    2022 की नीलामी में हुई थी गलती, सुप्रीम कोर्ट ने नई नीलामी का आदेश दिया

    यह विवाद 2022 में कटक जिले में महानदी रेत खनन की नीलामी से जुड़ा था, जिसमें एम/एस शांति कंस्ट्रक्शन प्रा. लि. ने ₹2,127.27 प्रति घन मीटर की सबसे ऊंची बोली लगाई थी। लेकिन टेंडर समिति ने उसकी बोली इस आधार पर खारिज कर दी कि उसने वित्त वर्ष 2020–21 का आयकर रिटर्न दाखिल किया था, जबकि शर्तों के अनुसार वित्त वर्ष 2021–22 का रिटर्न देना था। इसके बाद लीज़ ₹1,250 प्रति घन मीटर की काफी कम दर पर दूसरे बोलीदाता को दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह निर्णय टेंडर की गलत व्याख्या पर आधारित था और इससे राज्य को नुकसान पहुंचा। अदालत ने कहा कि “पिछले वित्त वर्ष” की व्याख्या 2020–21 के रूप में की जानी चाहिए थी। अदालत ने अपील स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि रेत खनन लीज़ की नई नीलामी कराई जाए ताकि जनता को प्राकृतिक संसाधनों का सही मूल्य मिल सके और राज्य सरकार मूल सफल बोलीदाता की जमा राशि 6% ब्याज सहित वापस करे। अदालत ने कहा कि ऐसे निर्णय प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता की भावना के खिलाफ हैं और राज्य की ट्रस्टी भूमिका के विपरीत हैं।

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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