SC की सख्त टिप्पणी: ₹100 करोड़ की ज़मीन ₹10 करोड़ में बेच दी, NSEL केस में HC आदेश पर रोक से इनकार
Praveen Mishra
27 May 2026 12:32 PM IST

NSEL घोटाले से जुड़ी हरियाणा की एक ज़मीन की नीलामी पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि करीब ₹100 करोड़ की ज़मीन को “संदिग्ध प्रक्रिया” के जरिए केवल ₹10 करोड़ में बेचा गया।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच क्विकर रियल्टी नामक वैल्यूअर कंपनी की याचिका सुन रही थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कंपनी को 5 साल के लिए ब्लैकलिस्ट करने का निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान CJI ने टिप्पणी की:
“₹100 करोड़ की संपत्ति को ₹10 करोड़ में बेच दिया गया और खरीदार उसी इलाके का निजी बिल्डर था। ऐसे में आप यहां किस आधार पर आए हैं?”
मामला हरियाणा की 35 एकड़ ज़मीन से जुड़ा है, जिसकी शुरुआती कीमत ₹74 करोड़ से अधिक आंकी गई थी। बाद में नई वैल्यूएशन रिपोर्ट में इसे कृषि भूमि मानते हुए कीमत घटाकर करीब ₹10 करोड़ कर दी गई और उसी रकम में नीलामी कर दी गई।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि ज़मीन को गलत तरीके से कृषि भूमि घोषित किया गया, जबकि वह रिहायशी क्षेत्र में स्थित थी। कोर्ट ने इसे “घोटाले के भीतर घोटाला” बताया था।
सुप्रीम कोर्ट ने भी वैल्यूएशन प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई। जस्टिस बागची ने सवाल किया कि सिर्फ निर्माण लाइसेंस खत्म होने से रिहायशी ज़मीन कृषि भूमि कैसे बन सकती है। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितताएं सामने आती हैं।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने MPID कोर्ट्स के कामकाज पर भी नाराज़गी जताई। CJI सूर्यकांत ने कहा कि एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के स्टे ऑर्डर के बावजूद बिक्री विलेख जारी किए गए थे। उन्होंने इसे गंभीर भ्रष्टाचार बताया।
आखिर में क्विकर रियल्टी ने अपनी SLP वापस लेने की अनुमति मांगी ताकि वह हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सके। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश पर रोक देने से साफ इनकार कर दिया।

