प्रत्यक्षदर्शी गवाह न होने मात्र से अभियोजन मामला कमजोर नहीं पड़ता : सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के दोषी की सजा बरकरार रखी
Praveen Mishra
12 May 2026 12:45 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (11 मई) को एक हत्या के आरोपी की सजा को बरकरार रखते हुए कहा कि किसी मामले में प्रत्यक्षदर्शी गवाह (Eyewitness) का न होना अभियोजन के लिए घातक नहीं माना जा सकता, यदि परिस्थितिजन्य साक्ष्य और मृतक का मृत्यु पूर्व बयान आरोपी के अपराध को स्पष्ट रूप से साबित करते हों।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। दोनों अदालतों ने आरोपी को हत्या का दोषी ठहराया था।
मामला अहमदाबाद के सोमाभाई संकाभाई रबारी की हत्या से जुड़ा है, जो चाय की दुकान चलाते थे। अभियोजन के अनुसार, 11 दिसंबर 1998 की रात आरोपी ने चाय की दुकान पर कप धोने के लिए रखी बाल्टी में आधी जली सिगरेट फेंक दी, जिस पर मृतक और आरोपी के बीच विवाद हो गया। इसी दौरान आरोपी ने मृतक को धमकी दी थी।
अगली सुबह मृतक के भाई को सूचना मिली कि सोमाभाई चाय की दुकान के पास घायल अवस्था में पड़े हैं। मौके पर पहुंचने पर मृतक ने कथित तौर पर अपने भाई को बताया कि आरोपी ने उसे चाकू मारा है। अस्पताल ले जाते समय ऑटो-रिक्शा में भी मृतक ने यही बात दोहराई, हालांकि अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू भी बरामद किया।
सुप्रीम कोर्ट में आरोपी ने दलील दी कि घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था और केवल PW-1 (मृतक के भाई) की गवाही के आधार पर दोषसिद्धि नहीं की जा सकती।
हालांकि कोर्ट ने यह तर्क खारिज कर दिया। जस्टिस अरविंद कुमार द्वारा लिखे गए फैसले में कहा गया कि केवल प्रत्यक्षदर्शी गवाह की अनुपस्थिति से अभियोजन का मामला कमजोर नहीं हो जाता, यदि आसपास की परिस्थितियां आरोपी की संलिप्तता को साबित करती हों।
कोर्ट ने कहा कि मृतक ने स्वयं PW-1 को बताया था कि आरोपी ने उस पर चाकू से हमला किया। इसके अलावा PW-12, जो एक ऑटो-रिक्शा चालक था, ने भी घटना से जुड़ी परिस्थितियों की पुष्टि की। अदालत ने कहा कि इन परिस्थितियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
खंडपीठ ने यह भी दोहराया कि आपराधिक कानून में साक्ष्य की “संख्या” नहीं बल्कि उसकी “गुणवत्ता” महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी एक गवाह की गवाही विश्वसनीय और मजबूत हो, तो उसी के आधार पर दोषसिद्धि की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि PW-12 की गवाही स्पष्ट, सुसंगत और विश्वसनीय थी तथा जिरह के दौरान उसमें कोई महत्वपूर्ण विरोधाभास सामने नहीं आया। अदालत ने माना कि यह साक्ष्य आरोपी की भूमिका को निर्णायक रूप से साबित करता है।
इन टिप्पणियों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की अपील खारिज कर दी और हत्या के मामले में उसकी दोषसिद्धि बरकरार रखी।

